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तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)

तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)

पण्डित तेनाली रामकृष्णन / लोक संकलन द्वारा

स्रोत: तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ) · भारतीय लोक साहित्य संकलन · 1950 (उद्गम)

DevanagariHindipublished118 पृष्ठ

पृष्ठ 41, कुल 118 में से

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पृष्ठ 41

तभी एक सभासद ने कहा, “महाराज, दरबार के निष्कर्ष को नहीं मानने का अर्थ यही है
कि तेनाली राम मानते हैं कि एक आदमी एक ही साथ हम सबको मूर्ख बना सकता है।”
तेनाली राम को अब गुस्सा आने लगा था। उसने महसूस किया कि दरबार के सभी
सभासद आज उसे निशाना बनाकर घेर रहे हैं और उसने जो नहीं कहा है, वही स्वीकार
करवाना चाहते हैं। वह असल में इस तरह की व्यर्थ की चर्चा में पड़ना नहीं चाहता था
जिसके कारण मौन था।
महाराज उसकी चुप्पी तोड़ना चाहते थे इसलिए उन्होंने तेनाली राम से सीधा सवाल
किया, “तो तेनाली राम! तुम यह मानते हो कि एक आदमी एक बार में पूरी सभा को मूर्ख
बना सकता है।”
अब तक तेनाली राम मन-ही-मन कुछ विचार कर चुका था। उसने आसन से उठकर कहा,
“अपराध क्षमा हो महाराज! ऐसा हो सकता है।”
”ठीक है!“ महाराज ने कहा, “हमें प्रतीक्षा रहेगी। पर स्मरण रखना कि ऐसे प्रयास के
समय तुम अकेले पड़ जाओगे और मेरे साथ सारे सभासद होंगे! सोचो, तब भी क्या तुम
हम सबको एक साथ मूर्ख बना दोगे?”
“जी हाँ महाराज!” विनम्रता से तेनाली राम ने कहा।
सारे सभासद तेनाली राम के इस उत्तर से सन्न रह गए। उन्हें तेनाली राम के इस उत्तर
का अनुमान ही नहीं था। उन्हें लगा कि तेनाली राम अपनी औकात भूल गया है। महाराज
उसके इस उत्तर से अवश्य नाराज होंगे। तेनाली राम की अब खैर नहीं।
दूसरी तरफ महाराज सोच रहे थे कि तेनाली राम में विशेष योग्यताएँ हैं। वह याद कर
रहा है कि महाराज सहित सारे सभासदों को एक बार में ही मूर्ख बनाया जा सकता है तो
उसके इस साहसपूर्ण उत्तर का आधार अवश्य होगा। तेनाली राम जैसा व्यक्ति कभी यूँही
अपना मान रखने के लिए कुछ नहीं बोलता। यह देखना रोचक होगा कि किस प्रकार वह
एक साथ सभी सभासदों को मूर्ख बनाता है।
उस दिन बात आई-गई हो गई। दूसरे दिन से महाराज के दरबार में सामान्य दिनों की
तरह ही काम-काज होने लगा। सभासद और महाराज तेनाली राम की बात को भूल गए।
एक दिन तेनाली राम अपनी खाट झाड़ रहा था। घर में सफाई हो रही थी। खाट झाड़ने
पर खाट से कुछ खटमल गिरे। खटमलों को देखकर तेनाली राम के मस्तिष्क में एक विचार
कौंध गया और उसने उनमें से मोटे-मोटे खटमलों को एकत्रित कर एक छोटी डिबिया में
बन्द कर लिया।