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तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)

तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)

पण्डित तेनाली रामकृष्णन / लोक संकलन द्वारा

स्रोत: तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ) · भारतीय लोक साहित्य संकलन · 1950 (उद्गम)

DevanagariHindipublished118 पृष्ठ

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चले गए।
तेनाली राम ने समझ लिया कि महाराज वहाँ से आवेश में गए हैं और उसे मालूम था कि
महाराज का आवेश जल्दी जाता नहीं है। तेनाली राम ने उस महिला और बच्चे को वैद्य से
दिखलाकर उन्हें विदा किया और राजभवन जाने की बजाय अपने घर लौट आया। बहुत
देर तक चिन्तन-मनन करने के बाद वह एक निष्कर्ष पर पहुँचा और अपने निष्कर्ष के
अनुरूप कुछ करने के लिए सक्रिय हुआ। उसने एक योजना का प्रारूप भोजपत्र पर तैयार
किया। प्रारूप तैयार हो जाने के बाद उसने उसे फिर से देखा, मनन किया। इसके बाद उसने
कपड़े बदले। घोड़ा निकाला और विजयनगर से बाहर निकलकर सुन्दर घाटी पहुँचा।
सुन्दर घाटी एक ऐसा राज्य था जहाँ के कलाकारों को दूर-दूर तक प्रसिद्धि प्राप्त थी।
तेनाली राम ने वहाँ एक प्रसिद्ध नाट्य संस्था के संचालक से भेंट की तथा उसे अपनी
योजना समझाई फिर उसे कुछ मुद्राएँ भेंट करते हुए कहा कि कार्यक्रम के बाद आपके सभी
कलाकारों को मेरी ओर से विशेष पुरस्कार भी मिलेगा और यह पुरस्कार यादगार भी
होगा और पारिश्रमिक भी।
दो दिनों के बाद ही विजयनगर में नववर्ष महोत्सव होना था। महाराज ने हर वर्ष की
तरह इस वर्ष भी स्वयं अपनी देखरेख में सारी तैयारियाँ करवाई थीं। उन्हें कई स्थलों पर
तेनाली राम की आवश्यकता महसूस हुई। तेनाली राम उस दिन से ही लापता था जिस
दिन महाराज के घोड़े की चपेट में आकर एक महिला और उसका बच्चा चोटिल हो गया
था। पहले तो महाराज को तेनाली राम के इस तरह गायब होने से बहुत क्रोध आया लेकिन
जब उसके गायब हुए दो दिन हो गए तब उन्हें भी अपनी भूलों का अहसास होने लगा।
उन्होंने मन-ही-मन स्वीकार किया कि उस दिन उनका आचरण न तो भद्रजन जैसा था और
न ही शासकोचित। उस महिला के साथ उन्होंने जो व्यवहार किया, वह अहंकारजनित
आचरण ही कहा जाएगा। ऐसा विचार कर महाराज ने तेनाली राम को बुलाने के लिए
सेवक को भेजा।
सेवक ने लौटकर सूचना दी कि तेनाली राम दो दिन पहले घोड़े से कहीं गए हैं तथा अभी
तक नहीं लौटे हैं। उनके घर में उनके इस तरह बिना किसी सूचना के कहीं चले जाने को
लेकर परिजन चिन्तित हैं।
यह सूचना मिलने पर महाराज और चिन्तित हो गए।
उसी दिन महाराज के पास दो कलाकार आए। उन्होंने महाराज से बताया कि वे सुन्दर
घाटी से आए हैं। हरियाली से भरे अपने राज्य के कलाकारों का एक कार्यक्रम विजयनगर के
नववर्ष महोत्सव के खुले मंच पर करना चाहते हैं। महाराज को उन कलाकारों ने बताया
कि उनका कार्यक्रम पीड़ित मानवता की सेवा का सन्देश देगा।