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तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)

तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)

पण्डित तेनाली रामकृष्णन / लोक संकलन द्वारा

स्रोत: तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ) · भारतीय लोक साहित्य संकलन · 1950 (उद्गम)

DevanagariHindipublished118 पृष्ठ

पृष्ठ 22, कुल 118 में से

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पृष्ठ 22

तेनाली राम ने विजयनगर की एक दुकान से महाराज के लिए पेठा मँगवा दिया।
मगर महाराज को इस पेठे में वह स्वाद नहीं मिला।
दूसरे दिन महाराज ने तेनाली राम को बताया कि कल जो पेठा खाया, उसमें वह बात ही
नहीं थी जो उस जंगलवाली महिला के पेठे में थी।
तेनाली राम ने किसी दूसरी दुकान से महाराज के लिए पेठा मँगा दिया मगर महाराज
को उससे भी सन्तुष्टि नहीं मिली।
इस प्रकार महाराज को बारी-बारी से विजयनगर की सभी दुकानों के पेठे खिलाए गए
मगर महाराज को उस महिला की झोंपड़ी में मिले पेठे का स्वाद नहीं मिला।
अन्ततः एक दिन तेनाली राम ने महाराज से जंगल में उस महिला से मिलने चलने के
लिए कहा। महाराज सहर्ष तैयार हो गए।
दूसरे दिन सुबह दोनों जंगल में उस महिला की झोंपड़ी की ओर चल दिए। महिला की
झोंपड़ी तक पहुँचते-पहुँचते दोनों थककर चूर हो गए। उन्हें भूख भी जोरों की लगी थी।
महिला की झोंपड़ी में जब वे दोनों पहुँचे तब महिला उन्हें देखकर बहुत प्रसन्न हुई। उसने
उन दोनों को बैठने के लिए चटाई बिछा दी। पीने के लिए पानी दिया।
महाराज ने महिला से कहा, “माँ, मुझे चना-गुड़ का पेठा खिलाओ। तुम्हारे हाथ का पेठा
खाने के लिए ही मैं यहाँ आया हूँ।”
महाराज की अपनापन-भरी बातें सुनकर महिला बहुत प्रसन्न हुई। उसने तुरन्त महाराज
के लिए पेठा बनाया।
इस बीच तेनाली राम ने महिला को बता दिया था कि चना-गुड़ का यह पेठा महाराज
को कितना पसन्द है और कैसे विजयनगर की हर दुकान का पेठा खाने के बाद भी महाराज
को उसके हाथ से बने पेठे का स्वाद नहीं मिला और वे पेठा खाने जंगल में आ गए।
पेठा बनाकर महिला ने महाराज और तेनाली राम के लिए परोस दिया। महाराज ने पेठा
खाने पर पायादृवही स्वाद! वही मिठास! वे पेठे के स्वाद में खो से गए। जी भर के पेठा
खाया और महिला के पेठे की खूब प्रशंसा की।
महिला ने पेठे के स्वाद का रहस्य खोलते हुए कहा, “राजन! जब तुम पहली बार पेठा
खाए थे, उस दिन भी तुम्हें खूब जोरों की भूख लगी थी। जंगल में भटकने के कारण
श्रमजनित थकन से तुम क्लान्त से थे। शरीर से खूब पसीना बह चुका था। इस प्रकार