तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)
पण्डित तेनाली रामकृष्णन / लोक संकलन द्वारा
स्रोत: तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ) · भारतीय लोक साहित्य संकलन · 1950 (उद्गम)
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तेनाली राम के लिए यह व्यंग्य-बुझी पंक्ति अप्रत्याशित थी। बिना उत्तेजित हुए तेनाली
राम ने कहा, “मैंने तो सिर्फ अपने महाराज के मन्तव्य की सूचना दी है! सूचना देने का
काम शिक्षा नहीं है। शिक्षा से तो ज्ञान मिलता है। सूचना और ज्ञान में बहुत अन्तर है।
सूचना हमेशा बाहर से मिलती है और ज्ञान हमेशा हमारे अन्दर से आता है।”
बादशाह बाबर ने मन-ही-मन तेनाली राम की प्रशंसा की किन्तु वह मौन साधे रहादृयह
सोचकर कि देखें अब यह तेनाली राम और क्या कहता है। मगर तेनाली राम ने दरबार का
रुख समझते हुए मौन साध लिया।
दूसरे दिन जब वह दिल्ली दरबार में आया तब उससे चुटकुले सुनाने की माँग की गई।
तेनाली राम ने कुछ चुटकुले सुनाए मगर दरबार का कोई भी आदमी उसके चुटकुलों पर
नहीं हँसा। तेनाली राम दो-चार चुटकुले सुनाकर बादशाह बाबर की आज्ञा लेकर
अतिथिशाला में लौट आया। उसके मस्तिष्क में कुछ चल रहा था। इस घटना के बाद
तेनाली राम दो दिनों तक दिल्ली दरबार नहीं गया। उसने दिल्ली भ्रमण के बहाने बाबर
की दिनचर्या का अध्ययन किया। इस अध्ययन में तेनाली राम ने पाया कि बादशाह बाबर
प्रतिदिन शाम को दरबार से निकलने के बाद यमुना नदी के किनारे टहलने के लिए जाते हैं
तथा राह में मिलनेवाले गरीब-लाचार लोगों को एक-दो स्वर्ण-मुद्रा भेंट करते जाते हैं।
इसके बाद तेनाली राम ने एक योजना बना ली और दिल्ली बाजार से कुछ सामग्री
खरीदकर अतिथिशाला लौट आया।
शाम का समय था। अपने दरबार से निकलकर बादशाह बाबर अपने एक खास मंत्री के
साथ बातें करते हुए यमुना तट की ओर जा रहा था। राजमार्ग के किनारे एक वयोवृद्ध
व्यक्ति को उसने जमीन खोदकर कोई बीज गाड़ते देखा। बाबर के लिए यह दृश्य
अचरजकारी था। एक तो मार्ग का किनारा जिससे इस वृद्ध का कोई लेना-देना नहीं फिर
भला क्यों वह यहाँ पर कोई बीज लगाएगा? उत्सुकतावश बाबर उस वृद्ध के पास पहुँच
गया। उसके साथ उसका मंत्री भी था।
वृद्ध के पास पहुँचकर बाबर ने पूछा, “बाबा! तुम यहाँ क्या कर रहे हो?”
अपने काम में मग्न वह वृद्ध बोला, “जहाँपनाह! मैं यहाँ फलदार वृक्षों के बीज लगा रहा
हूँदृकटहल, आम आदि के बीज! कुछ ही व_र्षों में यह स्थान पेड़ों के झुरमुटों से आच्छादित
हो जाएगा जिससे राह चलते लोगों को छाया मिल जाएगी। ये पेड़ वर्ष में एक बार फलों से
भी लद जाएँगे जिससे राहगीरों की क्षुधापूर्ति होगी।”
वृद्ध के उत्तर से बाबर चैंक पड़ा। बाबर ने वृद्ध से पूछा, “मगर बाबा! इससे तुमको क्या
हासिल होगा? जब तक इन बीजों से पौधे निकलकर फलदार वृक्ष में तब्दील होंगे तब तक