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सर्वकोश
तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)

तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)

पण्डित तेनाली रामकृष्णन / लोक संकलन द्वारा

स्रोत: तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ) · भारतीय लोक साहित्य संकलन · 1950 (उद्गम)

DevanagariHindipublished118 पृष्ठ

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महाराज कृष्णदेव राय अभी तक तेनाली राम की बातें गम्भीरता से सुन रहे थे। उन्होंने
अपनी चुप्पी तोड़ते हुए तेनाली राम से पूछा, “तेनाली राम! आखिर तुम इस गम्भीर
निष्कर्ष पर कैसे पहुँचे?”
“महाराज!“ तेनाली राम ने उत्तर दिया, “मैंने अपने विश्वस्त अनुचरों को उस दिन ही
‘सप्तद्वीप नवखंड’ भेज दिया था जिस दिन मवेशियों को कम मूल्य पर खरीदने के प्रयास में
कुछ लोग पकड़े गए थे। मेरे विश्वस्त अनुचरों में प्रशिक्षित गुप्तचरों जैसी सामर्थ्य है। उन्होंने
‘सप्तद्वीप नवखंड’ से सूचनाएँ एकत्रित कीं। इन सूचनाओं से यह स्पष्ट हो गया कि
विजयनगर में ‘सप्तदीप नवखंड’ के भेदिए सक्रिय हैं। महाराज! आप एक कार्य और
अविलम्ब करें कि जितने भी लोग मेरे अनुरोध पर कारागार में डाले गए हैं, उनसे कड़ाई से
पूछताछ कराएँ। अभी कई महत्त्वपूर्ण तथ्य सामने आ जाएँगे!”
महाराज कृष्णदेव राय को तेनाली राम की यह सलाह पसन्द आ गई। उन्होंने तेनाली
राम से कहा, “ठीक है, तेनाली राम! अब कल बातें होंगी! तुम अब अपना कार्य करो और
मैं अपना कार्य करूँगा!“
तेनाली राम महाराज कृष्णदेव राय का अभिवादन करके दरबार से लौट गया।
महाराज कृष्णदेव राय से मिलने मध्य रात्रि में सुरक्षा अधिकारी और कारागार
अधिकारी आए। गुप्त मंत्रणा कक्ष में बातें होती रहीं। कारागार अधिकारी और सुरक्षा
अधिकारी को विदा करने के बाद बाद महाराज कृष्णदेव राय ने सुरक्षा प्रहरी को एक
अतिरिक्त घोड़े के साथ तेनाली राम के घर जाकर उन्हें यथाशीघ्र बुला लाने के लिए कहा।
थोड़ी ही देर में सुरक्षा-प्रहरी के साथ घोड़े पर सवार तेनाली राम वहाँ पहुँच गया। उन्हें
अविलम्ब महाराज के ‘गुप्त मंत्रणा कक्ष’ में प्रवेश मिल गया।
महाराज कृष्णदेव राय अपने आसन पर विराजमान थे। उनकी आँखें लाल थीं। रात भर
जगने की थकान के लक्षण उनके चेहरे पर विराजमान थे। तेनाली राम की ओर थकी--ष्टि
डालते हुए उन्होंने उसे बैठने का संकेत किया। तेनाली राम एक आसन पर जैसे ही बैठा,
महाराज कृष्णदेव अपने आसन से उठ खड़े हुए और धीरे-धीरे चलते हुए तेनाली राम के
पास आ गए फिर तेनाली राम के कन्धों पर हाथ रखकर कहा, “तेनाली राम! तुम्हारा
अनुमान सही था। तुम्हारे द्वारा पकड़े गए लोग ‘सप्तद्वीप नवखंड’ राज्य के गुप्तचर संगठन
के सदस्य हैं। वे पाँच जोड़े विजयनगर के गाँवों में यह अफवाह फैला रहे थे कि पड़ोसी
राज्यों में मवेशियों की महामारी फैली है और इस महामारी में स्वस्थ गायें ही मर रही हैं।
इस अफवाह का उद्देश्य यह था कि लोग इस अफवाह से घबरा जाएँ और कम कीमत में
अपनी गायों को बेचने के लिए तैयार हो जाएँ। मवेशी व्यापारियों का दल भी यहाँ सप्तद्वीप
नवखंड के गुप्तचर संगठन ने ही भेजा था। तुम्हारी यह सूचना भी सही है कि विजयनगर के
सीमा क्षेत्रा में ‘सप्तद्वीप नवखंड’ की सैन्य गतिविधियाँ चिन्ताजनक रूप से बढ़ गई हैं। अब