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तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary

आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा

DevanagariHindipublished177 पृष्ठ

पृष्ठ 88, कुल 177 में से

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पृष्ठ 88

अध्याय - ५
भेदसङ्घाताभ्यां चाक्षुषः ॥२८॥
[ चाक्षुषः ] चक्षु इन्द्रिय से देखने योग्य स्कन्ध
[ भेदसङ्घाताभ्याम् ] भेद और सङ्घात दोनों के एकत्र रूप होने
से उत्पन्न होता है, अकेले भेद से नहीं।
(Molecules produced) by the combined action of
division (fission) and union (fusion) can be
perceived by the eyes.
सत् द्रव्यलक्षणम् ॥२९॥
[ द्रव्यलक्षणम् ] द्रव्य का लक्षण [ सत् ] सत् (अस्तित्व) है।
Existence (being or sat) is the differentia of a
substance.
उत्पादव्ययध्रौव्ययुक्तं सत् ॥३०॥
[ उत्पादव्ययध्रौव्ययुक्तं ] जो उत्पाद-व्यय-ध्रौव्य सहित हो
[ सत् ] सो सत् है।
Existence is characterized by origination,
disappearance (destruction) and permanence.
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