तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)
Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary
आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा
DevanagariHindipublished177 पृष्ठ
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अध्याय - ४
परेऽप्रवीचाराः ॥९॥
सोलहवें स्वर्ग से आगे के देव काम-सेवन रहित हैं। (उनके
कामेच्छा उत्पन्न ही नहीं होती तो फिर उसके प्रतिकार से क्या
प्रयोजन?)
The rest are without sexual desire.
भवनवासिनोऽसुरनागविद्युत्सुपर्णाग्नवातस्तनितोदधि-
द्वीपदिक्कुमाराः ॥१०॥
भवनवासी देवों के दश भेद हैं:- 1. असुरकुमार,
2. नागकुमार, 3. विद्युत्कुमार, 4. सुपर्णकुमार,
5. अग्निकुमार, 6. वातकुमार, 7. स्तनितकुमार,
8. उदधिकुमार, 9. द्वीपकुमार और 10. दिक्कुमार।
The Residential devas comprise Asura, Nāga,
Vidyut, Suparṇa, Agni, Vāta, Stanita, Udadhi,
Dvīpa and Dikkumāras.
व्यन्तराः किन्नरकिम्पुरुषमहोरगगन्धर्वयक्षराक्षसभूत-
पिशाचाः ॥११॥
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