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तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary

आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा

DevanagariHindipublished177 पृष्ठ

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पृष्ठ 49

अध्याय - ३
अथ तृतीयोऽध्यायः
The Lower World and the Middle World
रत्नशर्करावालुकापंकधूमतममोमहातमःप्रभाभूमयो
घनाम्बुवाताकाशप्रतिष्ठाः सप्ताधोऽधः ॥१॥
अधोलोक में रत्नप्रभा, शर्कराप्रभा, वालुकाप्रभा, पंकप्रभा,
धूमप्रभा, तमप्रभा और महातमप्रभा - ये सात भूमियाँ हैं और
क्रम से नीचे-नीचे घनोदधिवातवलय, घनवातवलय,
तनुवातवलय तथा आकाश का आधार है।
The lower world consists of seven earths* one
below the other, surrounded by three kinds of air
and space.
तासु त्रिंशत्पञ्चविंशतिपञ्चदशदशत्रिपञ्चोनैकनरक-
शतसहस्राणि पञ्च चैव यथाक्रमम् ॥२॥
उन पृथ्वियों में क्रम से पहली पृथ्वी में 30 लाख, दूसरी में
25 लाख, तीसरी में 15 लाख, चौथी में 10 लाख, पाँचवीं
में 3 लाख, छठवीं में पाँच कम एक लाख (99,995) और
सातवीं में 5 ही नरक बिल हैं। कुल 84 लाख नरकवास
बिल हैं।

  • Ratna, Şarkarā, Vālukā, Pańka, Dhūma, Tamaḥ and
    Mahātamaḥ – the word prabhā is taken with each of these.
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