तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)
Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary
आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा
पृष्ठ 169, कुल 177 में से
संदर्भ में पढ़ेंIndex (Hindi)
भवनवासी देव 51, 53, 54, 61, 64
भव्यत्व 18, 148
भाव 3, 4, 15, 18, 89, 99, 140,
148
मतिज्ञान 5, 6, 7, 9, 11, 19, 115
मध्यलोक 39
मन 7, 8, 23, 53, 80, 83, 94, 99,
107, 108
मनःपर्ययज्ञान 5, 10, 11, 12, 19,
115
मनुष्य 10, 18, 24, 34, 47, 49, 50,
53, 55, 56, 60, 87, 118
मार्दव 128
मान 18, 117
मानुषोत्तर 49
माया 18, 87, 117
मिथ्यादर्शन 18, 113
मिथ्याज्ञान 13, 19
मेरु 39, 48, 49, 55
मैथुन 93, 100
मोहनीय 86, 114, 116, 117, 121,
123, 132
मोक्ष 2, 3, 35, 60, 138, 146, 148
मोक्षमार्ग 1, 2
यथाख्यात 133
योग 80, 83, 85, 89, 99, 113,
124, 127, 142, 143, 146
योनि 27, 60
रत्नत्रय 4
रम्यक 40, 44
रौद्रध्यान 137
लब्धि 17, 22, 33
लिंग 18, 145, 150
लेश्या 18, 37, 51, 58, 59, 145
लोक 3, 70, 97, 128, 148, 150
लोभ 18, 95, 117
वचन 72, 80, 83, 94, 95, 99,
107, 108
वनस्पति 24
विक्रिया 37
विग्रहगति 25, 26
वितर्क 141, 142, 143
विदेह 40, 44, 45, 46, 47, 49
विधान 4
विनय 90, 134, 135
विपुलमति 10
वीचार 142, 143
वीर्य 16, 17, 82, 92
वेदना 37, 111, 139
वेदनीय 114, 116, 117, 121, 122,
125, 132
वैक्रियिक 29, 32, 33
वैमानिक देव 51, 56, 57, 58
वैयावृत्त्य 90, 134, 136
व्यञ्जन 143
व्यन्तर देव 51, 52, 53, 55, 64
व्युत्सर्ग 134, 135, 137
व्युपरतक्रियानिवर्ति 141, 142
शरीर 25, 29, 30, 31, 32, 33, 37,
53, 58, 72, 80, 96, 98, 107,
118, 119
156