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तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary

आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा

DevanagariHindipublished177 पृष्ठ

पृष्ठ 156, कुल 177 में से

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पृष्ठ 156

अध्याय - ९
The first two types are based on one substratum
and are associated with scriptural knowledge and
shifting.
अवीचारं द्वितीयम् ॥४२॥
[ द्वितीयम् ] ऊपर कहे गये शुक्लध्यानों में से दूसरा
शुक्लध्यान [ अवीचारं ] वीचार से रहित है, किन्तु सवितर्क
होता है।
The second type is free from shifting.
वितर्कः श्रुतम् ॥४३॥
[ श्रुतम् ] श्रुतज्ञान को [ वितर्कः ] वितर्क कहते हैं।
Vitarka is scriptural knowledge.
वीचारोऽर्थव्यञ्जनयोगसङ्क्रान्तिः ॥४४॥
[ अर्थव्यञ्जनयोगसङ्क्रान्तिः ] अर्थ, व्यञ्जन और योग का
बदलना सो [ वीचारः ] वीचार है।
Vicāra is shifting with regard to objects, words and
activities.
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