तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)
Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary
आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअध्याय - ८
opposites of these (commencing from individual
body), and Tīrthakaratva.
उच्चैर्नीचैश्च ॥१२॥
[ उच्चैर्नीचैश्च ] उच्चगोत्र और नीचगोत्र - ये दो भेद गोत्र
कर्म के हैं।
The high and the low.
दानलाभभोगोपभोगवीर्याणाम् ॥१३॥
[ दानलाभभोगोपभोगवीर्याणाम् ] दानान्तराय, लाभान्तराय,
भोगान्तराय, उपभोगान्तराय और वीर्यान्तराय - ये पाँच भेद
अन्तराय कर्म के हैं। प्रकृतिबन्ध के उपभेदों का वर्णन यहाँ
पूर्ण हुआ।
The obstructive karmas are of five kinds,
obstructing the making of gifts, gain, enjoyment of
consumable things, enjoyment of non-consumable
things, and effort (energy).
आदितस्तिसृणामन्तरायस्य च
त्रिंशत्सागरोपमकोटीकोट्यः परा स्थितिः ॥१४॥
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