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तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary

आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा

DevanagariHindipublished177 पृष्ठ

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अध्याय - ७
प्रवृत्ति करना और [ उपभोग-परिभोगानर्थक्यं ] भोग-उपभोग
के पदार्थों का जरूरत से ज्यादा संग्रह करना - ये पाँच
अनर्थदंडव्रत के अतिचार हैं।
Vulgar jokes, vulgar jokes accompanied by
gesticulation, garrulity, unthinkingly indulging in
too much action, keeping too many consumable and
non-consumable objects, are the five transgressions
of the vow of desisting from unnecessary sin.
योगदुष्प्रणिधानानादरस्मृत्यनुपस्थानानि ॥३३॥
[ योगदुष्प्रणिधानं ] मन सम्बन्धी परिणामों की अन्यथा प्रवृत्ति
करना, वचन सम्बन्धी परिणामों की अन्यथा प्रवृत्ति करना,
काय सम्बन्धी परिणामों की अन्यथा प्रवृत्ति करना,
[ अनादर ] सामायिक के प्रति उत्साह रहित होना,
[ स्मृत्यनुपस्थानं ] एकाग्रता के अभाव को लेकर सामायिक
के पाठ आदि भूल जाना - ये पाँच सामायिक शिक्षाव्रत के
अतिचार हैं।
Misdirected three-fold activity, lack of earnestness,
and fluctuation of thought, are the five
transgressions of concentration.
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