तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)
Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary
आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा
पृष्ठ 112, कुल 177 में से
संदर्भ में पढ़ेंअध्याय - ७
प्रमत्तयोगात्प्राणव्यपरोपणं हिंसा ॥१३॥
[ प्रमत्तयोगात् ] कषाय-राग-द्वेष अर्थात् अयत्नाचार
(असावधानी-प्रमाद) के सम्बन्ध से अथवा प्रमादी जीव के
मन-वचन-काय योग से [ प्राणव्यपरोपणं ] जीव के
भाव-प्राण का, द्रव्य-प्राण का अथवा इन दोनों का वियोग
करना सो [ हिंसा ] हिंसा है।
The severance of vitalities out of passion is injury.
असदभिधानमनृतम् ॥१४॥
प्रमाद के योग से [ असदभिधानं ] जीवों को दुःखदायक
अथवा मिथ्यारूप वचन बोलना सो [ अनृतम् ] असत्य है।
Speaking what is not commendable is falsehood.
अदत्तादानं स्तेयम् ॥१५॥
प्रमाद के योग से [ अदत्तादानं ] बिना दी हुई किसी भी
वस्तु को ग्रहण करना सो [ स्तेयम् ] चोरी है।
Taking anything that is not given is stealing.
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