तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)
Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary
आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा
DevanagariHindipublished177 पृष्ठ
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अध्याय - ७
अथ सप्तमोऽध्यायः
The Five Vows
हिंसाऽनृतस्तेयाब्रह्मपरिग्रहेभ्यो विरतिर्व्रतम् ॥१॥
[ हिंसाऽनृतस्तेयाब्रह्मपरिग्रहेभ्यो विरतिः ] हिंसा, झूठ, चोरी,
मैथुन और परिग्रह अर्थात् पदार्थों के प्रति ममत्वरूप परिणमन
- इन पाँच पापों से (बुद्धिपूर्वक) निवृत्त होना सो [ व्रतम् ]
व्रत है।
Desisting from injury, falsehood, stealing,
unchastity, and attachment, is the (fivefold) vow.
देशसर्वतोऽणुमहती ॥२॥
व्रत के दो भेद हैं - [ देशतः अणुः ] उपरोक्त हिंसादि पापों
का एकदेश त्याग करना सो अणुव्रत और [ सर्वतः महती ]
सर्वदेश त्याग करना सो महाव्रत है।
(The vow is of two kinds), small and great, from its
being partial and complete.
तत्स्थैर्यार्थं भावनाः पञ्च पञ्च ॥३॥
[ तत्स्थैर्यार्थं ] उन व्रतों की स्थिरता के लिये [ भावनाः पञ्च
पञ्च ] प्रत्येक व्रत की पाँच-पाँच भावनायें हैं।
किसी वस्तु का बार बार विचार करना सो भावना है।
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