तैत्तिरीय आरण्यक (सायण भाष्य एवं भट्टभास्कर भाष्य सहित सम्पूर्ण प्रथम भाग)
Taittiriya Aranyaka with Sayanacharya Commentary
कृष्ण यजुर्वेदीय महर्षि मण्डल (भाष्यकार: श्रीमत् सायणाचार्य) द्वारा
पृष्ठ 784, कुल 914 में से
संदर्भ में पढ़ें' ।"
Wait, what is inside the quotes?
"'मुक्तत्वात्तन्न' ।" or "'मुक्तत्वात्पन्न' ।"?
It says: 'मुक्तत्वात्तन्न' or 'मुक्तत्वात्पन्न'? Looks like 'मुक्तत्वात्पन्न' or 'मुक्तत्वात्तन्न'. Let's look at line 13: "जीवन्मुक्तस्य". If the variant was "जीवन्मुक्तत्वात्तन्न"?
Footnote 2:
"२ ग. ०यः । दगत्त दमाख्यस्तु श० । झ. ०यः । दमस्तु"
Wait, is it "दगत्त"?
Look at the characters: "द", then "ग", then "त" with something?
Wait, "दर्गत"? Look at line 10 where the text had "दर्मः" (or "दर्गत")?
Wait! In line 10, the text has: "तपो॒ऽग्निर्दर्मः" -> could it be "दर्गत"?
Wait, look at line 16: "यस्तु दमाख्यः २. शमयिता"
In footnote:
"२ ग. ०यः । द०गत दमाख्यस्तु श० । झ. ०यः । दमस्तु"
Wait, "द०गत" = "दमगत"? Or "द० [दकार]गत"?
Yes! "द०गत दमाख्यस्तु श० ।" means "दकारगत दमाख्यस्तु in manuscript श"!