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सर्वकोश
तैत्तिरीय आरण्यक (सायण भाष्य एवं भट्टभास्कर भाष्य सहित सम्पूर्ण प्रथम भाग)

तैत्तिरीय आरण्यक (सायण भाष्य एवं भट्टभास्कर भाष्य सहित सम्पूर्ण प्रथम भाग)

Taittiriya Aranyaka with Sayanacharya Commentary

कृष्ण यजुर्वेदीय महर्षि मण्डल (भाष्यकार: श्रीमत् सायणाचार्य) द्वारा

DevanagariSanskritpublished914 पृष्ठ

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पृष्ठ 710

तन्यरूपं!
Footnote 5 says: ५ ग. झ. ॰देवाधि॰ ।

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[प्रपा० १० अनु० १] कृष्णयजुर्वेदीयं तैत्तिरीयारण्यकम् । ७०५

Line 1:
अघमर्षणं कृत्वा तत ऊर्ध्वमवगाहनार्थास्तिस्र ऋचो दर्शयति—

Line 2:
यत्पृ॑थि॒व्याऽ॒ रज॑: स्व॑म॒न्तरि॑क्षे वि॒रोद॑सी । इ॒माऽ॒स्तदापो॑
Wait, is there an accent on रज॑:? Yes, udatta on ज: रज॑:.
Wait, is स्व॑ accented? Yes, udatta on स्व॑.
म॒ has anudatta.
न्तरि॑ has udatta on रि.
क्षे has no accent.
वि॒ has anudatta.
रोद॑ has udatta on द.
सी has no accent.
। danda.
इ॒ has anudatta.
माऽ॒स्तदापो॑: इ॒माऽ॒स्तदापो॑.

Line 3:
`व॑रु॑णः पु॒नात्व॑घम॒र्षण॑ः । ए॒ष