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सर्वकोश
तैत्तिरीय आरण्यक (सायण भाष्य एवं भट्टभास्कर भाष्य सहित सम्पूर्ण प्रथम भाग)

तैत्तिरीय आरण्यक (सायण भाष्य एवं भट्टभास्कर भाष्य सहित सम्पूर्ण प्रथम भाग)

Taittiriya Aranyaka with Sayanacharya Commentary

कृष्ण यजुर्वेदीय महर्षि मण्डल (भाष्यकार: श्रीमत् सायणाचार्य) द्वारा

DevanagariSanskritpublished914 पृष्ठ

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पृष्ठ 684

: there is a vertical tick!
Wait, why does it look like:
Wait, let's look at the danda after विद्या: "वि॒द्या ।"
Then: "पर॒मे व्योम॑न्प्र॒तिष्ठि॑ता, इति ।"
Wait, what is after प्रतिष्ठिता?
A comma: ", इति ।"
Yes, exactly!

Let's read all lines carefully from L1 to the end:

L1:
[प्रपा० ९ अनु० १] कृष्णयजुर्वेदीयं तैत्तिरीयारण्यकम्। ६७९

L2:
सृष्टिप्रलयावहोऱात्रवत्क्रमेण पुनः पुनः पर्यावर्तेते । तथा सत्येकस्य वस्तुनः परस्परवि-
Wait, is it "सृष्टिप्रलयावहोऱात्रवत्क्रमेण" or "सृष्टिप्रलयावहोरात्रवत्क्रमेण"?
"सृष्टिप्रलयावहोरात्रवत्क्रमेण" - standard Sanskrit: सृष्टिप्रलयौ + अहोरात्रवत् -> सृष्टिप्रलयावहोरात्रवत्.
Yes, "सृष्टिप्रलयावहोरात्रवत्क्रमेण".
Then: "पुनः पुनः पर्यावर्तेते । तथा सत्येकस्य वस्तुनः परस्परवि-"

L3:
"रुद्धरूपद्वयासंभवादेकस्य स्वाभाविकत्वमितरस्याऽऽगन्तुकत्वं च वक्तव्यम् ।