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सर्वकोश
तैत्तिरीय आरण्यक (सायण भाष्य एवं भट्टभास्कर भाष्य सहित सम्पूर्ण प्रथम भाग)

तैत्तिरीय आरण्यक (सायण भाष्य एवं भट्टभास्कर भाष्य सहित सम्पूर्ण प्रथम भाग)

Taittiriya Aranyaka with Sayanacharya Commentary

कृष्ण यजुर्वेदीय महर्षि मण्डल (भाष्यकार: श्रीमत् सायणाचार्य) द्वारा

DevanagariSanskritpublished914 पृष्ठ

पृष्ठ 529, कुल 914 में से

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पृष्ठ 529

? Wait, look at तै: it has an e-matra तेand a dot? No,तै. It says तैदिदमित्येतदनुकृति(orतदिदमित्येतदनुकृति). Let's look closely: the letter is तैorते॑? It has two strokes above त: तैदिदमित्येतदनुकृतिorते दिदमित्येतदनुकृति. Wait, उच्चारिते तदिदमित्येतदनुकृति! If line 9 ends with तद्यस्मिन्नुच्चार-, then तेwas combined:तैis a typo in the book forते! Wait, let's transcribe faithfully what is printed: तैदिदमित्येतदनुकृति ।`

Let's check line 10:
तैदिदमित्येतदनुकृति । प्रसिद्धद्योतनार्था ह स्म वा इति त्रयो निपाताः । प्र
(At end of line 10: । प्र or । प्रण? It is । प्र)

Line 11:
णवभागसादृश्यमोकारे प्रसिद्धमित्यर्थः । अपिशब्दो वक्ष्यमाणोदाहरणसमुच्चयार्थः
Wait, at end of line 11: समुच्चयार्थः or समुच्चयार्थः ।?
There is a colon-like visarga समुच्चयार्थः and