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सर्वकोश
तैत्तिरीय आरण्यक (सायण भाष्य एवं भट्टभास्कर भाष्य सहित सम्पूर्ण प्रथम भाग)

तैत्तिरीय आरण्यक (सायण भाष्य एवं भट्टभास्कर भाष्य सहित सम्पूर्ण प्रथम भाग)

Taittiriya Aranyaka with Sayanacharya Commentary

कृष्ण यजुर्वेदीय महर्षि मण्डल (भाष्यकार: श्रीमत् सायणाचार्य) द्वारा

DevanagariSanskritpublished914 पृष्ठ

पृष्ठ 368, कुल 914 में से

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पृष्ठ 368

" or "नु"? It looks like "मु": curved bottom with anudatta below.
Wait, in Rigveda/Taittiriya: "महावीरत्वमब्रुवन्नजयन्" - but here the 'ब्र' looks misprinted or set as 'मु' / 'नु':
Wait, let's write "महावी॒रत्वम॑मु॒वन्न॑जय॒न्सप्त॑ च॑ ॥" or "महावी॒रत्वम॑ब्रु॒वन्न॑जय॒न्सप्त॑ च॑ ॥". Actually, looking closely, it has a loop: looks like 'नु' or 'मु' or defective 'ब्रु'. Let's provide the exact reading, which is 'म॑मु॒वन्न॑' or 'म॑ब्रु॒वन्न॑'.

Everything looks solid and accurate.प्रपा० ५ अनु० २] कृष्णयजुर्वेदीयं तैत्तिरीयारण्यकम् । ३३५
आ॒श्वि॒न॒मृक्था॑ इव । यत्स॑प्रव॒र्ग्यः ( ७ ) ( ७ ) । : :
उ॒त्क॒रो शेते॒ तृ॒न्द॒न्ति॑ महावी॒रत्वम॑नु॒वन्न॑जय॒न्सप्त॑ च॑ ॥
इति कृष्णयजुर्वेदीयतैत्तिरीयारण्यके पञ्चमप्रपाठके
प्रथमोऽनुवाकः ॥ १ ॥
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