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सर्वकोश
तैत्तिरीय आरण्यक (सायण भाष्य एवं भट्टभास्कर भाष्य सहित सम्पूर्ण प्रथम भाग)

तैत्तिरीय आरण्यक (सायण भाष्य एवं भट्टभास्कर भाष्य सहित सम्पूर्ण प्रथम भाग)

Taittiriya Aranyaka with Sayanacharya Commentary

कृष्ण यजुर्वेदीय महर्षि मण्डल (भाष्यकार: श्रीमत् सायणाचार्य) द्वारा

DevanagariSanskritpublished914 पृष्ठ

पृष्ठ 366, कुल 914 में से

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पृष्ठ 366

or is itआ॒र्च्छत्? Yes, आ॒र्च्छत्`!

Line 11:
तद॒र्थका॑मयत । तेनापा॑क्रामत् । तं दे॒वा अ॒न्वाय॑न् ।

  • तद॒र्थका॑मयत: underline under द, acute over का -> तद॒र्थका॑मयत (Wait, Taittiriya text: तदर्थमकामयत or तदर्थकामयत? In text: तद॒र्थका॑मयत - wait, is there an 'म'? Look at: त द॒ र्थ का॑ म य त! Wait, where is म? तदर्थकामयत - wait, or तदर्थमकामयत? Look at line 11: त द॒ र्थ का॑ म य त - no 'म' before कामयत! Wait, Taittiriya Aranyaka 5.1.1 actually says: "तद् देवा अकामयन्त" or "तद् अर्थकामयत"? Traditional text: "तदर्थमकामयत" vs "तदर्थकामयत". Here printed: तद॒र्थका॑मयत.)
  • ।
  • तेनापा॑क्रामत्: acute over पा -> `तेनापा