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सर्वकोश
तैत्तिरीय आरण्यक (सायण भाष्य एवं भट्टभास्कर भाष्य सहित सम्पूर्ण प्रथम भाग)

तैत्तिरीय आरण्यक (सायण भाष्य एवं भट्टभास्कर भाष्य सहित सम्पूर्ण प्रथम भाग)

Taittiriya Aranyaka with Sayanacharya Commentary

कृष्ण यजुर्वेदीय महर्षि मण्डल (भाष्यकार: श्रीमत् सायणाचार्य) द्वारा

DevanagariSanskritpublished914 पृष्ठ

पृष्ठ 247, कुल 914 में से

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पृष्ठ 247

(क्ष्म)र्यमयान्..." -> আহवनीकार्क्ष्मर्यमयान् / आहवनीयात् कार्क्ष्मर्यमयान्!
Wait! Look at line 29:
"कार्ष्म(क्ष्म)र्यमयान्परिधीन्परिदधाति” इत्यादि । हे प्रस्तोतः प्रवर्ग्यार्थानि सामानि गाय"
Wait, why does line 28 end with:
"विहरत्याहवनी॑"?
No, it's "विहरत्याहवनी-", and line 29 has "कार्ष्म(क्ष्म)र्यमयान्..." - wait, the full word is:
"विहरत्याहवनीयकार्क्ष्मर्यमयान्परिधीन्परिदधाति" or "विहरत्याहवनीयात्"?
Wait, look at line 28 end:
"आहवनी" with a stroke on top of नी: that's an apostrophe or hyphen or svarita?
Wait, line 29 starts with:
"कार्ष्म(क्ष्म)र्यमयान्..." - wait, where is the 'य'?
In Baudhāyana Śrautasūtra: "अथ प्रतिप्रस्थाता प्रवर्ग्यं विहरत्याहवनीयात् कार्ष्मर्यमयान् परिधीन् परिदधाति"!
Wait, in line 28, the last characters are:
आ - ह - व - नी - यं? No, it's नी with a small tick or half