सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
तैत्तिरीय आरण्यक (सायण भाष्य एवं भट्टभास्कर भाष्य सहित सम्पूर्ण प्रथम भाग)

तैत्तिरीय आरण्यक (सायण भाष्य एवं भट्टभास्कर भाष्य सहित सम्पूर्ण प्रथम भाग)

Taittiriya Aranyaka with Sayanacharya Commentary

कृष्ण यजुर्वेदीय महर्षि मण्डल (भाष्यकार: श्रीमत् सायणाचार्य) द्वारा

DevanagariSanskritpublished914 पृष्ठ

पृष्ठ 200, कुल 914 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 200

। आरण्या द्विखुरादयस्तथा ये ग्राम्या गवाश्वादयस्तानप्युत्पादितवान् । पशूना-`

Line 26 ends with पशूना-
Line 27 starts with: [मन्त]रिक्षद्वारा वायुदेवत्यत्वं मन्त्रान्तरव्याख्याने समाम्नातम्—‘वायवस्थेत्याह वायुर्वा

Line 27 ends with वायुर्वा
Line 28 starts with: [अन्त]रिक्षस्याध्यक्षः । अन्तरिक्षदेवत्याः खलु वै पशवः । वायव एवैनान्परिद-

Line 28 ends with परिद-
Line 29 starts with: [दा]ति’ इति ।

  • Footnotes:
    १ क. घ. ‘न्ति । ते ह्यादि’ । २ ग. यः । ३ क. ख. ॰नसं यज्ञं नि’ ।
    Wait, in footnote 1: १ क. घ. 'ति । ते ह्य्रादि' । or 'ति । ते ह्यादि'?
    Looking at ह्यादि: it has ह्य with ा -> ह्यादि.

Let's output the text faithfully with line markers to . Bracket the reconstructed trimmed characters like `[प्र