तैत्तिरीय आरण्यक (सायण भाष्य एवं भट्टभास्कर भाष्य सहित सम्पूर्ण प्रथम भाग)

तैत्तिरीय आरण्यक (सायण भाष्य एवं भट्टभास्कर भाष्य सहित सम्पूर्ण प्रथम भाग)
Taittiriya Aranyaka with Sayanacharya Commentary
कृष्ण यजुर्वेदीय महर्षि मण्डल (भाष्यकार: श्रीमत् सायणाचार्य) द्वारा
DevanagariSanskritpublished914 पृष्ठ
पृष्ठ 11, कुल 914 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 11
- हे आपो`. Beautiful!
Line 28:
पहितापहित ।
Wait, does it say पहितापहित?
Look at the letters:
पहितापहित -> प हित अपहित?
Wait! In the mantra: अप॑ दे॒वीरि॒तो हि॑त
Sayana says: अपहित अपहित । वियोजयतेत्यर्थः ।
Wait, in line 27-28:
Line 27 ends with: ...यूयम-
Line 28 begins with: पहितापहित ।
Together: यूयमपहितापहित? Or यूयम- hyphen, then पहित अपहित?
Wait, अपहित + अपहित -> अपहित अपहित with an elided अ?
Line 27 ends: यूयम-
Line 28 starts: पहितापहित ।
Wait, look at line 28:
पहितापहित ।
Wait, why पहित? Ah, यूयमपहित अपहित!
यूयम् + अपहित = यूयमपहित!
Line 27: यूयम-
Line 28: पहितापहित ।
Wait, is there an avagraha? No, पहितापहित - wait, पहित अपहित -> sandhi