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सर्वकोश
स्याद्वादमञ्जरी (आचार्य मल्लिषेण सूरि - डॉ. जगदीशचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

स्याद्वादमञ्जरी (आचार्य मल्लिषेण सूरि - डॉ. जगदीशचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

Syadvadamanjari of Mallishena Suri with Hindi Commentary

आचार्य मल्लिषेण सूरि (अनुवादक: डॉ. जगदीशचन्द्र जैन) द्वारा

DevanagariHindipublished458 पृष्ठ

पृष्ठ 424, कुल 458 में से

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पृष्ठ 424

२० श्रीमद्राजचन्द्रजैनशास्त्रमालायां
वादमहार्णव ?—
६ योग—
पतंजलि—आधुनिक योगसूत्रोंके रचयिता अनेक विद्वान महाभाष्यकार और योगसूत्रोंके कर्ता पतंज-
लिको एक ही व्यक्ति मानते हैं। इन विद्वानोंके मतमें पतंजलिका समय ईसवी सन्के पूर्व १५० वर्ष माना
जाता है।
व्यास—पतंजलिके योगसूत्रोंके टीकाकार। मल्लषेणने इन्हें पातंजलटीकाकार कहकर उल्लेख किया
है। इनके समयके विषयमें भी विद्वानोंमें मतभेद हैं। कुछ व्यासको ईसवी सन्के पूर्व प्रथम शताब्दिका और
कुछ ईसवी सन्की चौथी शताब्दिका विद्वान कहते हैं।
७ पूर्वमीमांसा—
जैमिनी—मीमांसासूत्रोंके रचयिता। समय ईसाके पूर्व २०० वर्ष।
भट्ट—भट्टको कुमारिलभट्ट भी कहा जाता है। शबरभाष्यके टीकाकार। यह टीका श्लोकवार्तिक,
तन्त्रवार्तिक ओर टुपटीका इन तीन भागोंमें विभक्त है। समय ८ वीं शताब्दिका पूर्वभाग।
मृगेन्द्र ?—
वेद—ऋग्वेद, अथर्ववेद, सामवेद और यजुर्वेद इन चारों वेदोंमें ऋग्वेद संसारके उपलब्ध साहित्यमें
प्राचीनतम माना जाता है। ऋग्वेदके समयके विषयमें बहुत मतभेद हैं। ऋग्वेदका समय कमसे कम ईसवी
सन्के पूर्व ४५०० वर्ष माना जाता है। यजुर्वेदकी शुक्ल यजुर्वेदसंहिता और कृष्ण यजुर्वेदसंहिता नामकी दो
संहिता हैं।
ब्राह्मण—चारों वेदोंके अलग-अलग ब्राह्मण हैं। एतरेयब्राह्मण ऋग्वेदका, और तैत्तिरीयब्राह्मण कृष्ण
यजुर्वेदका ब्राह्मण है। ब्राह्मण-साहित्यका समय बुद्धके पूर्व है।
सूत्र—सूत्रसाहित्य वेदका अंग है। आश्वलायन ऋषिने आश्वलायनगृह्यसूत्र और वशिष्ठ ऋषिने
वसिष्ठधर्मसूत्रकी रचना की है।
८ वेदान्त—
उपनिषद्—वृहदारण्यक, छान्दोग्य, मुण्डक, ईशावास्य उपनिषदें—प्राचीन ग्यारह उपनिषदोंमेंसे मानी
जाती हैं। शंकराचार्यने इनपर टीका लिखी हैं। प्राचीन उपनिषदोंका समय गौतम बुद्धके पूर्व माना जाता है।
शंकर—ब्रह्माद्वैत अथवा केवलाद्वैतके प्रतिष्ठापक। उपनिषद्, गीता और ब्रह्मसूत्रके टीकाकार।
समय ८वीं शताब्दी है।
नोट—इसके अतिरिक्त, मल्लिषेणने स्याद्वादमंजरीमें महाभारतकार व्यास, मनुस्मृति, भर्तृहरिका
वाक्यपदीय, कालिदासका कुमारसंभव, माघका शिशुपालवध, बाणकी कादम्बरी, वार्तिककार, अमर और
त्रिपुरार्णवके उद्धरण दिये हैं, अथवा इनका उल्लेख किया है।