स्याद्वादमञ्जरी (आचार्य मल्लिषेण सूरि - डॉ. जगदीशचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)
Syadvadamanjari of Mallishena Suri with Hindi Commentary
आचार्य मल्लिषेण सूरि (अनुवादक: डॉ. जगदीशचन्द्र जैन) द्वारा
पृष्ठ 423, कुल 458 में से
संदर्भ में पढ़ेंस्याद्वादमञ्जरीमें निर्दिष्ट ग्रन्थकार ( २ ) १९
न्यायबिन्दुटीका—धर्मोत्तरने न्यायबिन्दुके ऊपर टीका लिखी है समय ईसवी सन् ८४७ ।
अशोक—पं० अशोकका समय ईसवी सन् ९०० है । उन्होंने अपोहसिद्धि, सामान्यदूषणदिक् प्रसारिता
और अवयविनिराकरण ग्रंथ लिखे हैं ।
प्रज्ञाकरगुप्त—प्रज्ञाकरगुप्तका समय ईसवी सन् १९४० है । मल्लिषेणने इनका अलंकारकारके रूपमें
उल्लेख किया है । प्रज्ञाकरगुप्तने प्रमाणवार्तिकालंकारकी रचना की है ।
मोक्षाकरगुप्त— मोक्षाकरगुप्तका मल्लिषेणने दो जगह उल्लेख किया है । समय ई. स. ११०० के
लगभग ।
तत्त्वोपप्लवसिंह—यह ग्रंथ पाटणके जैन भंडार से मिला है। इसके कर्ता जयराशिभट्ट हैं । ये तत्त्वोप-
प्लववादी अथवा तत्त्वोपप्लवसिंहके नामसे भी कहे जाते थे ।
३ न्याय—
अपवाद—न्यायसूत्रके प्रणेता । इन्हें गौतम भी कहा जाता है । न्यायदर्शन योगदर्शनके नामसे भी
प्रसिद्ध है । कुछ विद्वान न्यायसूत्रोंकी रचनाको ईसवी सन्के पूर्व, और कुछ ईसवी सन्के पश्चात् स्वीकार
करते हैं ।
न्यायवार्तिक—न्यायवार्तिकके कर्ता प्रसिद्ध नैयायिक उद्योतकर हैं । समय ईसवी सन्की ७ वीं शता-
ब्दीका पूर्वार्ध ।
जयन्त—न्यायमंजरीके कर्ता । समय ईसवी सन् ८८० ।
न्यायभूषणसूत्र—अपर नाम न्यायसार, इसके कर्ता भासर्वज्ञ है । समय ईसवी सन्की दसवीं शता,
ब्दिका आरंभ ।
उदयन—उदयन आचार्य दसवीं शताब्दिके उत्तर भागमें हुए हैं । इन्होंने वाचस्पतिमिश्रकी न्यायता-
त्पर्यटीकापर न्यायतात्पर्यपरिशुद्धि, किरणावलि आदि ग्रंथोंकी रचना की है ।
४ वैशेषिक—
कणाद—वैशेषिक सूत्रोंके रचयिता कणादको कणभक्ष अथवा औलूक्य नामसे भी कहा जाता है ।
वैशेषिकसूत्रोंकी रचनाका समय कमसे कम ईसाकी प्रथम शताब्दि ।
प्रशस्तपाद—वैशेषिकसूत्रोंपर प्रशस्तपादभाष्यके कर्ता । समय ईसवी सन्की चौथी-पाँचवीं शताब्दि ।
श्रीधर—प्रशस्तपादभाष्यपर न्यायकन्दलीके रचयिता । समय ई. स. ९९१ ।
५ सांख्य—
कपिल—सांख्यमतके आद्यप्रणेता । कपिलको परमर्षि कहा गया है । अर्ध-ऐतिहासिक व्यक्ति ।
आसुरि—कपिलके साक्षात् शिष्य थे । समय ईसवी सन्के पूर्व ।
विन्ध्यवासी—वास्तविक नाम रुद्रिल । समय ईसाकी तीसरी-चौथी शताब्दि ।
ईश्वरकृष्ण—सांख्यकारिका अथवा सांख्यसप्ततिके कर्ता । इनके समयके विषयमें विद्वानोंमें मत भेद
है । कोई ईश्वरकृष्णको ईसवी सन्के पूर्व प्रथम शताब्दिका, ओर कोई ईसाकी चौथी शताब्दिका विद्वान्
कहते हैं ।
गौड़पादभाष्य—शंकराचार्यके गुरु गोविन्दके गुरु । समय ईसवी सन्की ८ वीं शतान्दीका आरंभ ।
वाचस्पति—सर्वतन्त्रस्वतंत्र वाचस्पतिने सांख्यदर्शनपर सांख्यकारिकापर सांख्यतत्त्वकौमुदी नामकी
लिखी है । वाचस्पतिमिश्रने न्याय, योग, पूर्वमीमांसा ओर वेदान्त दर्शनोंपर भी ग्रंथ लिखे हैं । समय ईसवी
सन् ८५० ।