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सर्वकोश
स्याद्वादमञ्जरी (आचार्य मल्लिषेण सूरि - डॉ. जगदीशचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

स्याद्वादमञ्जरी (आचार्य मल्लिषेण सूरि - डॉ. जगदीशचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

Syadvadamanjari of Mallishena Suri with Hindi Commentary

आचार्य मल्लिषेण सूरि (अनुवादक: डॉ. जगदीशचन्द्र जैन) द्वारा

DevanagariHindipublished458 पृष्ठ

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१६ श्रीमद्राजचन्द्रजैनशास्त्रमालायां
श्लोक ३२ पृष्ठ
समवान्वात् तमंसः [ हैमशब्दानुशासन ७-३-८० ] २६७
अदेवे देवबुद्धिर्या गुरुर्धीरगुरौ च या ।
अधर्मे धर्मबुद्धिश्च मिथ्यात्वं तद्विपर्ययात् ॥
[ हेमचन्द्र-योगशास्त्र २-३ ] २६७
पाणवहाईआणं पावट्ठाणाण जो उ पडिसेहो ।
झाणज्झयणाईणं जो य विही एस धम्मकसो ॥
वज्झाणुट्ठाणेणं जेण ण बाहिज्जए तयं णियमा ।
संभवइ य परिसुद्धं सो पुण धम्मम्मि छेडत्ति ॥
जीवाइभाववाओ बंधाइपसाहगो इहं तावो ।
एएसिं परिसुद्धो धम्मो धम्मत्तणमुवेइ ॥
[ हरिभद्र-पंचवस्तुक चतुर्थद्वार ] २६८
नोट—इन अवतरणोंके अतिरिक्त मल्लिषेणने स्याद्वादमंजरीमें हरिभद्रकी न्यायप्रवेशवृत्ति, हेमचन्द्रकी प्रमाणमीमांसा,
देवसूरिका स्याद्वादरत्नाकर, रत्नप्रभाचार्यकी स्याद्वादरत्नावतारिका आदि ग्रन्थोंके वाक्योंका शब्दशः उपयोग किया है ।
मल्लिषेणने इन वाक्योंको अवतरण रूपमें उल्लेख नहीं किया ।