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सर्वकोश
स्याद्वादमञ्जरी (आचार्य मल्लिषेण सूरि - डॉ. जगदीशचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

स्याद्वादमञ्जरी (आचार्य मल्लिषेण सूरि - डॉ. जगदीशचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

Syadvadamanjari of Mallishena Suri with Hindi Commentary

आचार्य मल्लिषेण सूरि (अनुवादक: डॉ. जगदीशचन्द्र जैन) द्वारा

DevanagariHindipublished458 पृष्ठ

पृष्ठ 33, कुल 458 में से

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in line 37:कम्hasक+म्. In line 31: तद्विलक्षणम् ।hasण+म्. In line 32: वदन्ननुभवोचितम् ।Wait, let's look at line 32:जातिव्यक्त्वात्मकं वस्तु वदन्ननुभवोचितम् ।It's definitelyवदन्ननुभवोचितम् ।(orवदन्ननुभवोचिम्४? No, look at चितम्: it's चि+त+म्). It is चितम्where the printing was slightly smudged. Line 33:भट्टो वापि मुरारिर्वा नानेकान्तं प्रतिक्षिपेत् ॥Line 34:अबद्धं परमार्थेन बद्धं च व्यवहारतः ।Line 35:ब्रुवाणो ब्रह्मवेदान्ती नानेकान्तं प्रतिक्षिपेत् ॥Line 36:ब्रुवाणा भिन्नभिन्नान्धीन्नियतभेदव्यपेक्षया ।Wait, let's re-verifyभिन्नभिन्नान्धीन्नियतभेदव्यपेक्षया: Is it भिन्नभिन्नान्धीन्नियतभेदव्यपेक्षया? Wait, look at न्धी`: does it have an anusvara?
Above the letter,