सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
स्याद्वादमञ्जरी (आचार्य मल्लिषेण सूरि - डॉ. जगदीशचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

स्याद्वादमञ्जरी (आचार्य मल्लिषेण सूरि - डॉ. जगदीशचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

Syadvadamanjari of Mallishena Suri with Hindi Commentary

आचार्य मल्लिषेण सूरि (अनुवादक: डॉ. जगदीशचन्द्र जैन) द्वारा

DevanagariHindipublished458 पृष्ठ

पृष्ठ 313, कुल 458 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 313

सर जे० सी० बोसने टिन, शीशा६, प्लैटिनम आदि धातुओंमें भी Footnote marker:शीशा६`.

  • Line 16:
    प्रतिक्रिया ( Response ) सिद्ध की है ।७
    Footnote marker: है ।७.

  • Line 17:
    परस्पर विरुद्ध अर्थको प्रतिपादन करनेवाले अन्य दर्शन एक दूसरेसे ईर्ष्या करते हैं, अतएव सम्पूर्ण

  • Line 18:
    नय स्वरूप होनेसे भगवानका सिद्धान्त ही मात्सर्य रहित हो सकता है—

  • Divider:
    There is a horizontal line below line 18. We can represent it or continue with footnotes. The user prompt says "line by line... prefix each line with line marker like , ".

  • Footnotes:

    • Line 19:
      १. सम्यग्दर्शनज्ञानचारित्रपरिणामेन भविष्यतीति भव्यः । तद्विपरीतोऽभव्यः । तत्त्वार्थराजवार्तिक २-७,
      Wait, let's verify तद्विपरीतोऽभव्यः:
      तद्विपरीतोऽभव्यः । -> yes, avagraha ऽ.
      तत्त्वार्थराजवार्तिक २-७,
    • Line 20:
      `७,