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सर्वकोश
स्याद्वादमञ्जरी (आचार्य मल्लिषेण सूरि - डॉ. जगदीशचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

स्याद्वादमञ्जरी (आचार्य मल्लिषेण सूरि - डॉ. जगदीशचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

Syadvadamanjari of Mallishena Suri with Hindi Commentary

आचार्य मल्लिषेण सूरि (अनुवादक: डॉ. जगदीशचन्द्र जैन) द्वारा

DevanagariHindipublished458 पृष्ठ

पृष्ठ 31, कुल 458 में से

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पृष्ठ 31

के रूपमें ही पाया जाता है। स्याद्वादको प्रस्फुटित करनेवाले जैन आचार्योंमें ईसवी सन्‌को
Wait, look at "सन्‌को" or "सन्‌ की" or "सन्‌को"?
"ईसवी सन्‌को" -> wait, look at the matra: "ईसवी सन्‌को" or "सन्‌ की"?
It is "सन्‌को": स + न् + क + ो = सन्‌को. Yes!

Line 17:
चौथी शताब्दीके विद्वान् सिद्धसेन दिवाकर और समंतभद्रका नाम सबसे महत्वपूर्ण है। ये दोनों अपूर्व प्रतिभा-

Line 18:
शाली उच्च कोटिके दार्शनिक विद्वान थे। इन विद्वानोंने जैन तर्कशास्त्रपर सन्मतितर्क, न्यायावतार, युक्त्यनु-

Line 19:
शासन, आप्तमीमांसा आदि स्वतंत्र ग्रन्थोंकी रचना की। सिद्धसेन और समंतभद्रने अनेक प्रकारके

Line 20:
दृष्टांतोंसे और नयोंके सापेक्ष वर्णनसे स्याद्वादका अभूतपूर्व ढंगसे प्रतिपादन किया, तथा जैनेतर सम्पूर्ण दृष्टियों

Line 21:
को अनेकान्त दृष्टिके अंशमात्र प्रतिपादन कर३ मिथ्यादर्शनोंके समूहको जैनदर्शन बताते हुए४ अपनी सर्वसमन्व-
Notice कर३ and हुए४ have supers