स्याद्वादमञ्जरी (आचार्य मल्लिषेण सूरि - डॉ. जगदीशचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)
Syadvadamanjari of Mallishena Suri with Hindi Commentary
आचार्य मल्लिषेण सूरि (अनुवादक: डॉ. जगदीशचन्द्र जैन) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें18 ग्रंथ और ग्रंथकार
टीकाकार मल्लिषेण
मल्लिषेण नामके अनेक जैन आचार्य हो गये हैं।¹ हेमचन्द्रकी अन्ययोगव्यवच्छेदिकाके ऊपर स्याद्वाद-
मंजरी टीका लिखनेनेवाले प्रस्तुत मल्लिषेणसूरि श्वेताम्बर विद्वान हैं। मल्लिषेणने अन्ययोगव्यवच्छेद द्वात्रिं-
शिकाकी टीकाके अतिरिक्त अन्य कौनसे ग्रन्थोंकी रचनाकी है, ये कहांके रहनेवाले थे, आदि बातोंके संबंधमें
कुछ विशेष पता नहीं लगता । स्याद्वादमंजरीके अंतमें दी हुई प्रशस्ति²से केवल इतना ही मालूम होता है कि
नागेन्द्रगच्छीय³ उदयप्रभसूरि⁴ मल्लिषेणके गुरु थे, तथा शक संवत् १२१४ ( ई. स. १२९३) में दीपमालिका
१. पं. नाथूराम प्रेमीजीने अपनी विद्वद्रत्नमाला ( प्रथम भाग ) में मल्लिषेण नामके दो दिगम्बर विद्वानों-
का उल्लेख किया है। एक मल्लिषेण उभयभाषाचक्रवर्ती कहे जाते थे, जो संस्कृत और प्राकृत दोनों
भाषाओंके महाकवि थे । अब तक इनके महापुराण, नागकुमार महाकाव्य, और सज्जनचित्तवल्लभ नामके
तीन ग्रन्थोंका पता लगा है । दूसरे मल्लिषेण 'मलधारिन्' नामसे प्रसिद्ध थे । ये शक संवत् १०५०
में फाल्गुन कृष्ण तृतीयाके दिन श्रवणवेलगुलमें समाधिस्थ हुए थे । प्रवचनसारटीका, पंचास्तिकायटीका,
ज्वालिनीकल्प, प द्मावतीकल्प, वज्रपंजरविधान, ब्रह्मविद्या और आदिपुराण नामक ग्रन्थ भी मल्लिषेण
आचार्यके नामसे प्रसिद्ध हैं । परन्तु यह नहीं कहा जा सकता कि ये ग्रन्थ कौनसे मल्लिषेणने रचे थे ।
२. नागेन्द्रगच्छगोविन्दवक्षोऽलंकारकौस्तुभाः ।
ते विश्ववन्द्या नन्द्यासुरुदयप्रभसूरयः ॥
श्रीमल्लिषेणसूरिभिरकारि तत्पदगगनदिनमणिभिः ।
वृत्तिरियं मनुरविमितशाकाब्दे दीपमहसि शनौ ॥
श्रीजिनप्रभसूरिणां साहाय्योद्भिन्नसौरभा ।
श्रुतावृत्तंसतु सतां वृत्तिः स्याद्वादमंजरी ॥
३. मोतीलाल लाघाजीने आर्हंतमतप्रभाकर पूनासे प्रकाशित स्याद्वादमंजरीकी प्रस्तावनामें नागेन्द्रगच्छके
आचार्योंकी परम्परा निम्न प्रकारसे दी है—
शीलगुणसूरि
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देवचन्द्रसूरि
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शीलरुद्रगणि ――――――――――――――――|―――――――――――――――― पार्श्वलगणि
महेन्द्रसूरि
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आनन्दसूरि ――――― शान्तिसूरि ――――― अमरचन्द्रसूरि
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|___ हरिभद्रसूरि
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|___ विजयसेनसूरि
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उदयसेनसूरि उदयप्रभसूरि यशोदेवसूरि
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मल्लिषेणसूरि
४. उदयप्रभसूरिने धर्माभ्युदयमहाकाव्य, आरंभसिद्धि, उपदेशमालाकर्णिकावृत्ति आदि ग्रन्थोंकी रचनाकी है ।