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सर्वकोश
स्याद्वादमञ्जरी (आचार्य मल्लिषेण सूरि - डॉ. जगदीशचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

स्याद्वादमञ्जरी (आचार्य मल्लिषेण सूरि - डॉ. जगदीशचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

Syadvadamanjari of Mallishena Suri with Hindi Commentary

आचार्य मल्लिषेण सूरि (अनुवादक: डॉ. जगदीशचन्द्र जैन) द्वारा

DevanagariHindipublished458 पृष्ठ

पृष्ठ 18, कुल 458 में से

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दिया है । इस संस्करणके तैयार करनेमें प्रो. आनन्दशंकर बापूभाई ध्रुवकी स्याद्वादमंजरी तथा अन्य अनेक
ग्रन्थोंसे जो मुझे सहायता मिली है, उसका यथास्थान उल्लेख किया गया है । इन सबका आभारी हूँ ।
जुबेलीबाग,
तारदेव बम्बई \ } \qquad \qquad \qquad \qquad \qquad \qquad \qquad जगदीशचन्द्र जैन
२०-६-३५ /
द्वितीय आवृत्ति की भूमिका
स्याद्वादमंजरी संस्कृत एवं अंग्रेजी की विविध परीक्षाओं के पाठ्यक्रम में अनेक वर्षों से नियत है ।
तरुण जैन साधु-साध्वियां भी जैन दर्शन का सरल एवं बोधगम्य भाषा में ज्ञान प्राप्त करने के लिये इस ग्रंथ
का पारायण करते आये हैं ।
किन्तु इधर अनेक वर्षोंसे इस ग्रंथके उपलब्ध न होनेके कारण विद्यार्थियोंको बड़ी कठिनाईका सामना
करना पड़ रहा था । साहित्यप्रेमी डॉक्टर आदिनाथ नेमिनाथ उपाध्येका ध्यान इस ओर आकर्षित हुआ ।
रायचन्द्र शास्त्रमालाके अधिकारियोंसे उन्होंने पत्रव्यवहार किया । इसका परिणाम है यह प्रस्तुत संस्करण
जो पूर्व संस्करणके ३५ वर्ष बाद प्रकाशित हो रहा है ।
अनुवादके संशोधित और परिमार्जित करनेमें कोई कमी नहीं रखी गई है । फलटण (महाराष्ट्र)के वयो-
वृद्ध संस्कृत एवं जैन दर्शनके विद्वान् प्रोफेसर एम. जी. कोठारीका संशोधनमें हार्दिक सहयोग प्राप्त हुआ है ।
अस्वस्थ रहते हुए भी आपने इस कार्यमें रुचि दिखाई है ।
२८ शिवाजी पार्क
बंबई २८ \qquad \qquad \qquad \qquad \qquad \qquad \qquad \qquad \qquad जगदीशचन्द्र जैन
१-६-७०