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सर्वकोश
स्याद्वादमञ्जरी (आचार्य मल्लिषेण सूरि - डॉ. जगदीशचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

स्याद्वादमञ्जरी (आचार्य मल्लिषेण सूरि - डॉ. जगदीशचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

Syadvadamanjari of Mallishena Suri with Hindi Commentary

आचार्य मल्लिषेण सूरि (अनुवादक: डॉ. जगदीशचन्द्र जैन) द्वारा

DevanagariHindipublished458 पृष्ठ

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विषय पृष्ठ
अद्वैतवादका खंडन ११६
श्लोक १४ कथंचित् सामान्यविशेषरूप वाच्यवाचक भावका समर्थन १२०
एकान्त सामान्यवादी अद्वैतवादी, मीमांसक और सांख्योंका पूर्वपक्ष १२०
एकान्त विशेषवादी बौद्धोंका पूर्वपक्ष १२२
स्वतंत्र सामान्य-विशेषवादी न्याय-वैशेषिकोंका पूर्वपक्ष १२३
उक्त तीनों पक्षोंका खंडन १२४
शब्दका पौद्गलिकत्व १२६
आत्माका कथंचित् पौद्गलिकत्व १२८
शब्द और अर्थका कथंचित् तादात्म्य संबंध १२८
सम्पूर्ण पदार्थोंमें भावाभावत्वकी सिद्धि १२९
अपोह, जाति विधि आदि शब्दार्थका खंडन १३३
श्लोक १५ सांख्योंके सिद्धान्तोंपर विचार १३४
सांख्योंका पूर्वपक्ष १३५
पूर्वपक्षका खंडन १३८
सांख्योंकी अन्य विरुद्ध कल्पनायें १४२
श्लोक १६-१९ १४४-१९१
श्लोक १६ सौत्रांतिक, वैभाषिक और योगाचार बौद्धोंके सिद्धांतोंका खंडन
प्रमाण और प्रमिति अभिन्न हैं-पूर्वपक्षका खंडन १४४
क्षणिकवाद और उसका खंडन १४८
ज्ञान पदार्थसे उत्पन्न होकर पदार्थको जानता है-खंडन १५२
ज्ञानाद्वैत-पूर्वपक्ष और उत्तरपक्ष १५६-५९
श्लोक १७ शून्यवादियोंका खंडन १६८-१७८
प्रमाता, प्रमेय, प्रमाण और प्रमितिकी असिद्धि-पूर्वपक्ष १६९
उत्तरपक्ष १७१
आत्माकी सिद्धि १७२
सर्वज्ञकी सिद्धि १७६
प्रमेय, प्रमाण और प्रमितिकी सिद्धि १७७
श्लोक १८ क्षणिकवादमें कृतप्रणाश आदि दोष १७९
क्षणिकवादका परिवर्तित रूप १८५
श्लोक १९ वासना और क्षणसंतति भिन्न, अभिन्न, और अनुभय रूपसे असिद्ध १८६-१९१
बौद्धमतमें वासना ( आलयविज्ञान ) में दोष १८८
श्लोक २० चार्वाकमतपर विचार १९२-१९६
केवल प्रत्यक्षको प्रमाण माननेवाले चार्वाकोंका खंडन १९२
भौतिकवादका खंडन १९४
श्लोक २१-२८ स्याद्वादकी सिद्धि १९६-२५५
श्लोक २१ प्रत्येक वस्तुमें उत्पाद, व्यय और ध्रौव्यकी सिद्धि १९६
श्लोक २२ प्रत्येक पदार्थमें अनन्त धर्मात्मकता २००
श्लोक २३ सप्तभंगीका प्ररूपण २०४-२२१
मिथ्यादृष्टि द्वादशांगको पढ़कर भी उसे मिथ्याश्रुत समझता है २०६