स्वदेशी और भारतीयता (धरमपाल एवं राजीव दीक्षित - स्वावलम्बी अर्थनीति एवं ग्राम-स्वराज्य दर्शन)

स्वदेशी और भारतीयता (धरमपाल एवं राजीव दीक्षित - स्वावलम्बी अर्थनीति एवं ग्राम-स्वराज्य दर्शन)
Swadeshi Aur Bhartiyata: Swavalambi Arthniti evam Gram Swarajya Darshan
धरमपाल एवं राजीव दीक्षित विचार पीठ द्वारा
DevanagariHindipublished50 पृष्ठ
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स्वदेशी और भारतीयता
कॉपीराईट : लेखक
पहला संस्करण : सितम्बर 2001 (3000 प्रतियां)
दूसरा संस्करण : जुलाई 2002 (5000 प्रतियां)
प्रकाशक :
भारत पीठम्
चांडक निवास, शास्त्री चौक
वर्धा (महाराष्ट्र) 442101
फोन नं. – (07152) 84441, 42851
मुद्रक : कॉन्फीसेक प्रिंटर्स, अहमदाबाद
मूल्य: 20 रुपये
विषय सूची
दो शब्द
प्रस्तावना
- स्वदेशी और भारतीयता – 9
- गांधी को गाली देना नया नहीं है –20
- जारी हैं गांधी पर नेहरू के हमले – 24
- हिंदुस्तानी तासीर दफनाने के लिये अंग्रेजों ने बनवाई कांग्रेस – 28
- अपना नियंत्रण खत्म हुआ तो न स्वायत्तता रहेगी न स्वावलंबन –31
- आम आदमी की ताकत पहचानने से ही बनेगा स्वदेशी मॉडल – 35
- पश्चिमीकरण को मानने वाले आज भी दो फीसदी – 39
- भारतीय मॉडल सम्पत्ति जोड़ने का नहीं बँटवारे का है – 43
- विकास का सवाल – 47
- भारतीय समाज बनाम पश्चिमी समाज व्यवस्था – प्रथम – 63
11.भारतीय समाज बनाम पश्चिमी समाज व्यवस्था – द्वितीय – 68 - भारत का पुनर्निर्माण – 72
- हमारे सपनों का भारत – 78
- अंग्रेजी शासन और तंत्र व्यवस्था – 88
- कहाँ हैं पश्चिमीकरण की जड़ें – 93
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