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सर्वकोश
स्वरोदय विज्ञान

स्वरोदय विज्ञान

Swarodaya Vigyan

श्री स्वामी जी महाराज (पीताम्बरा पीठाधीश्वर) द्वारा

स्रोत: स्वरोदय विज्ञानं - पीताम्बरा पीठाधीश्वर · पीताम्बरा पीठ (उद्गम)

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(स्वरोदय विज्ञान)

इति जिभ्या स्थंभव-विधि

अथ उच्चाटन उथाटन - विधि

सत्रै उचाटै मन में जुचित्ता, तो मंत्र सुनियै दै कान मित्ता।
समसान माटी जो जाइ लीजै, सो सात चुकटी नीकें गिनीजै।
पै सूरनाडी तेहिकाल जानौं, जिहि काल माटी कौं जाइ आनौं।
जल जो बहै जू ताकै किनारै, घड़ी येक मैं जूल्यायै पियारै।
स्वासा जो जानौं बाहिर को आवै, सो मृतिका लै तामै बहावै।
जो नाम ध्यानै इति भांति ठानो, सो न बसै जू तेहि नग्र मानौ।
जौ भानु नाडी स्वर मैं सु जानौं, पीपर की खूटी तौ येक ठानौं।
सप्तांगुली है परमान जाकौं, जिहि देहरी पै गाडौं सु ताकौं।
सो गांव छांडै बहु दुःख पावै, जोगी जु जाने सो यह बतावै।
द्वै मैं जु चाहै हित कौ नसावौं, तौ अर्क के जू मुनि पुष्प लावौं।
लै नाम दोऊ तिनो की जरवै, जो सूर्य नाडी तिहि काल पावै।
केती बखानी विधि मारिवे की, ते नाहि मानै जन जो विवेकी।
ताही ते नाही कहिवे मैं आई, जो भावते के मन मैं न भाई।
सत्रै जु चाहै निज मित्र कीजै, ताको बखानी चित दै सुनी जै।
नाडी ससी की तिथि वार ताके, बैठो ससी धातु मतीर वाके।
तब मित्र होई जो सत्र कोई, इहि भांति भाषौ ज्ञानी जु सोई।

इति उचाटन-विधि

अथ अनुग्रह -विधि

काहू अनुग्रह कीनौ जु चाहौं, जा भांति भाषौ सो तुम निबाहौं।
गुरु प्रात मानौं सित पक्ष माँही, भानोदये जो जेहि काल नाँही।
लै चन्द नाडी कल्यान चाहै, आसीर्वादे जिहि विधि निबाहै।
सब सुःख बाढै धन बुद्धि होई, गौरी न जानौं यह संस कोई।