सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
DevanagariHindipublished838 पृष्ठ
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संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 826मानाध्याय
मास | पूर्णिमा के नक्षत्र क्रम- | १६६१ | १६६२ | १६६३ | १६६४ | १६६५ विक्रमी
आश्विन | २६—उत्तराभाद्रपद | अश्विनी | रेवती | भरणी | अश्विनी | रेवती
कार्त्तिक | २—भरणी | कृत्तिका | भरणी + | रोहिणी | कृत्तिका | भरणी +
मार्गशीर्ष| ५—मृगशिरा | मृगशिरा | मृगशिरा | आर्द्रा | मृगशिरा | रोहिणी +
पौष | ७—पुनर्वसु | पुष्य | पुनर्वसु | पुष्य | पुनर्वसु | पुनर्वसु
माघ | ९—आश्लेषा | मघा | आश्लेषा | पू० फाल्गुनी + | मघा | आश्लेषा
फाल्गुन | ११—पूर्वाफाल्गुनी | उत्तरा फाल्गुनी | पू० फाल्गुनी | हस्त | उ० फाल्गुनी | पूर्वाफाल्गुनी