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सर्वकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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तैयार कराके संस्थान को सौंपे । स्वर्गीय महावीर प्रसाद श्रीवास्तव के पुत्र श्री श्रीकृष्ण
श्रीवास्तव, अवकाश प्राप्त जज, ने इस कार्य में रुचि ली । विज्ञान परिषद् के
महामंत्री डा० शिवगोपाल मिश्र जी ने समस्त ग्रन्थ का प्रूफ-संशोधन कार्य स्वयं
तपस्या-पूर्वक तत्परता से किया । सूर्य-सिद्धान्त का मूल संस्कृत पाठ प्रो० कृपाशंकर
शुक्ल, लखनऊ विश्वविद्यालय, के सम्पादित संस्करण के आधार पर दिया गया है ।
पाठ के संशोधन में हमें यथेष्ट सहायता अपने वयोवृद्ध सदस्य पं० ओंकारनाथ शर्मा
जी से भी प्राप्त हुई थी । हम इन सब के आभारी हैं ।
स्वर्गीय श्री श्रीवास्तव जी ने पुस्तक की एक विस्तृत भूमिका (४३ पृष्ठों की)
लिखी थी, जो अन्तिम खण्ड के साथ प्रकाशित हुई थी (१६४०) । खेद है, कि उनकी
यह भूमिका वर्तमान संस्करण में पूरी तरह से नहीं दी जा सकी है । इसके कुछ ही
आवश्यक अंश हम यहाँ दे रहे हैं । स्व० श्रीवास्तव जी ने विज्ञान परिषद् प्रयाग द्वारा
प्रकाशित "सरल विज्ञानसागर" (१६४६) ग्रन्थ में भारतीय ज्योतिष् पर अत्युपयोगी
सामग्री दी है । यदि यह अलग से प्रकाशित हो जाय, तो अत्युत्तम होगा ।
स्वर्गीय श्री महावीर प्रसाद श्रीवास्तव ने यह विज्ञान-भाष्य अपने दिवंगत
पूज्य पिता जी को समर्पित किया था । समर्पण के शब्द थे—"पूज्य पिताजी की
पुण्य स्मृति में, जिनके चरणों में बैठकर गणित का प्रथम पाठ पढ़ा था ।"
—उषा ज्योतिष्मती
डॉ० रत्नकुमारी स्वाध्याय संस्थान, अध्यक्ष
प्रयाग अनुसंधान विभाग
१५ मार्च १६८२