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सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

पृष्ठ 770, कुल 838 में से

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पृष्ठ 770

भूगोलाध्याय ७४५
होती है तब यह भूपृष्ठ के किस भाग पर दिखाई पड़ सकता है। यह स्पष्ट है कि
इस समय सूर्य उस स्थान के खस्वस्तिक पर रहता है, जिसका दक्षिण अक्षांश
२०° १०' है। इसलिए इस स्थान पर मध्याह्नकालिक छाया भी शून्य होगी और
यहाँ से भूपरिधि के चतुर्थ भाग तक अर्थात् ९० अंश उत्तर दक्षिण तक सूर्य दिखाई
पड़सकता है। २०° १०' दक्षिण अक्षांश से ९० अंश उत्तर के स्थान का अक्षांश
९०° - २०° १० = ६९°५०' हुआ। इसलिए इस दिन सूर्य की किरणें यहीं तक जा
सकती हैं। इसके बाद जब तक सूर्य की दक्षिण क्रांति २०° १०' से अधिक दक्षिण
होगी तब तक वह ६९° ५०' के उत्तर अक्षांश पर नहीं देख पड़ेगा अर्थात् इस स्थान
पर दो मास की रात होगी। इसके प्रतिकूल ६९° ५०' दक्षिण अक्षांश पर दो महीने
का दिन होगा। इस स्थान का योजनात्मक अन्तर विषुवत् रेखा से क्या होगा यही
जानने का नियम इन दोनों श्लोकों में बतलाया गया है जो श्लोक ५६ में बतलाये
गये नियम के अनुसार है और जिसका व्यवहार श्लोक ६०-६१ में किया गया है।
इसी तरह जब सूर्य सायन मिथुन और कर्क राशियों में रहता है तब इसकी
उत्तर क्रान्ति २०° १०' से अधिक होती है जिससे ६९° ५०' उत्तर अक्षांश के
स्थानों पर इन दो महीने तक सूर्य बराबर देख पड़ता है इसलिए यहाँ दो मास का
दिन होता है और इतने ही दक्षिण अक्षांश पर लगातार दो महीने तक सूर्य अदृश्य
होने के कारण रात रहती है।
चार महीने का दिन या रात कहाँ होती है—
एकज्यापक्रमानीतैयोजनैः परिवर्जितैः ।
भूमिकक्ष्या चतुर्थांशे व्यक्षाच्छेषैस्तु योजनैः ॥६५॥
धनुर्मूगालिकुम्भेषु संस्थितोऽर्को न दृश्यते ।
देवभागेऽसुराणां तु वृषाद्ये मचतुष्टये ॥६६॥
अनुवाद—(६५) एक राशि की क्रान्ति के योजनों को भूपरिधि के चतुर्थांश
से घटाने पर जो आवे विषुवत् रेखा से उतने ही अन्तर पर (६६) उत्तर में धनु,
मकर, कुम्भ, और मीन राशियों का सूर्य नहीं देख पड़ता और दक्षिण में वृष, मिथुन,
कर्क और सिंह राशियों का सूर्य नहीं देख पड़ता ।
विज्ञान-भाष्य—जब सूर्य सायन धनु, मकर, कुम्भ और मीन राशियों में
रहता है तब इसकी दक्षिण क्रान्ति एक राशि की क्रान्ति से अर्थात् ११° २६' से
अधिक होती है इसलिए इन चार महीनों में सूर्य उस स्थान पर नहीं देख पड़ता
जिसका उत्तर अक्षांश ९०° - ११° २६' = ७८° ३४' है। इसका फल यह होता है
कि इन दिनों यहाँ चार महीने की रात होती है परन्तु ७८° ३४' दक्षिण अक्षांश पर
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