सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
पृष्ठ 769, कुल 838 में से
संदर्भ में पढ़ें७४४ सूर्य-सिद्धान्त
अनुवाद—इन अक्षांशों के बीच के देशों में अहोरात्र का प्रमाण ६० घड़ी
का होता है और इस समय के भीतर दिन और रात की वृद्धि होती है परन्तु इसके
सिवा अन्य स्थानों में यह नियम बदल जाता है क्योंकि वहां नक्षत्र-कक्षा की स्थिति
बदल जाती है।
दो महीने का दिन या रात कहाँ होती है—
ऊने भूवृत्तापादे तु द्विज्यापक्रमयोजनैः ।
धनुर्मृगस्थः सविता देवभागे न दृश्यते ॥६३॥
तथा चासुरभागे तु मिथुने कर्कटे स्थितः ।
नष्टच्छाया महीवृत्तापादे दर्शनमादिशेत् ॥६४॥
अनुवाद—(६२) दो राशियों की क्रांति के योजनों को भूपरिधि के
चतुर्थांश से घटाने पर जो आवे, विषुवत् रेखा से, उतने ही अन्तर पर उत्तर में धनु
और मकर राशि का सूर्य नहीं देख पड़ता और (६४) दक्षिण में मिथुन और कर्क
राशि का सूर्य नहीं देख पड़ता । क्योंकि जिस स्थान पर मध्याह्नकाल में छाया शून्य
होती है उस स्थान से भूपरिधि के चतुर्थांश तक सूर्य देख पड़ता है ।
विज्ञान-भाष्य—श्लोक ६४ के उत्तरार्ध का अर्थ स्वामी विज्ञानानन्द जी ने
अपनी बंगला टीका में यह किया है कि जिस स्थान में भूच्छाया नहीं है वहाँ सूर्य का
दर्शन होता है । गूढ़ार्थ प्रकाशिका संस्कृत टीका में इसका अर्थ यों किया गया है
'अभावं प्राप्ता छाया भूच्छाया तत्र तादृशे भूपरिधि चतुर्थांशे सूर्यस्य दर्शनं सदा
कथयेत्' । पं० इन्द्रनारायण द्विवेदी तथा माधव पुरोहित की हिन्दी टीका में इसका
अर्थ ही नहीं है । मैंने इसका अर्थ यों किया है कि जिस स्थान पर किसी वस्तु की
मध्याह्नकालिक छाया शून्य होती हैं उस स्थान से भूपरिधि के चतुर्थ भाग पर्यन्त तक
उस दिन सूर्य देख पड़ता है । क्योंकि जहाँ मध्याह्नकालिक छाया शून्य होती है वहीं
के ख-स्वस्तिक पर सूर्य होता है और यहीं से ९० अंश तक चारों ओर सूर्य इस समय
देख पड़ता है । इसके सिवा 'छाया' का अर्थ भूच्छाया करना ठीक नहीं, मध्याह्न
छाया ही उचित है । इसलिए 'नष्टच्छाया' का अर्थ है वह स्थान जहाँ की मध्याह्न
छाया शून्य हो ।
इन दो श्लोकों में यह बतलाया गया है कि जब सूर्य सायन धनु और मकर
राशियों में रहता है तब कहाँ दो मास की रात होती है । जब सूर्य सायन धनु में
प्रवेश करता है तब इसकी दक्षिण क्रान्ति २०° १०′ होती है (देखो पृष्ठ ३१६) और
जब तक यह धनु और मकर राशियों में रहता है तब तक इसकी दक्षिण क्रान्ति
२०° १०′ से अधिक होती है । अब देखना है कि जब सूर्य की दक्षिण क्रांति २०°१०′