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सर्वकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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पृष्ठ 706

दशम् अध्याय
शृङ्गोन्नत्यधिकार
(संक्षिप्त वर्णन)
[श्लोक १—चन्द्रमा का उदय अस्त जानने की विधि पहले की तरह है और
कालांश १२ हैं। श्लोक २-४—शुक्ल पक्ष में चन्द्रमा का दैनिक अस्तकाल जानने की
रीति । श्लोक ५—कृष्ण पक्ष में चन्द्रमा का दैनिक उदयकाल जानने की रीति ।
श्लोक ६-८—सूर्यास्तकाल में सूर्य से चन्द्रमा का रेखात्मक अन्तर जानने की रीति ।
श्लोक ६—चन्द्रमा के शुक्ल भाग का बिम्ब जानने की रीति । श्लोक १०-१४—
चन्द्रमा के शुक्ल भाग का परिलेख खींचने की रीति । श्लोक १५—कृष्ण पक्ष में
चन्द्रबिम्ब का परिलेख खींचने का नियम ।]
इस अध्याय में चन्द्रमा का उदयास्त काल जानने की रीति बतलायी गयी
है। इससे पहले के अध्याय में केवल उस प्रकार के उदय अस्त का वर्णन है जिसमें
ग्रह सूर्य के बहुत पास आ जाने से अदृश्य हो जाता है। परन्तु इस अध्याय में इस
प्रकार के उदय अस्त के सिवा चन्द्रमा का दैनिक उदयास्त काल जानने की रीति भी
है। फिर यह जानने की रीति बतलायी गयी है कि किस दिन चन्द्र-बिम्ब का कितना
भाग प्रकाशित रहता है और उसका आकार कैसे खींचा जा सकता है। शुक्ल पक्ष के
आरम्भ में अथवा कृष्ण पक्ष के अन्त में चन्द्रमा के प्रकाशित या शुक्ल भाग का
आकार शृङ्ग की तरह होता है और उत्तर या दक्खिन की तरफ उठा रहता है
इसीलिए इस अध्याय का नाम शृङ्गोन्नत्यधिकार है ।
यहाँ यह याद दिलाने की आवश्यकता है कि चन्द्रमा का स्पष्ट स्थान सूर्य-
सिद्धान्त की गणना की रीति से जाने गये स्थान से बहुत भिन्न होता है जैसा कि
स्पष्टाधिकार के पृष्ठ १८६-१६६ में अच्छी तरह दिखलाया गया है। इसके सिवा
चन्द्रमा की स्पष्ट क्रान्ति भी सूर्य-सिद्धान्त की रीति से ठीक नहीं होती। इन सब
कारणों से इस अध्याय के लिए दृग्गणित के मूलाङ्कों से ही काम लेना चाहिए, नहीं
तो सूर्य-सिद्धान्त के मूलाङ्कों के द्वारा चन्द्रमा के उदयास्त का जो समय ज्ञात होगा
वह प्रत्यक्ष से १५,१६ मिनट आगे पीछे होगा। इसलिए आवश्यक है कि भारतीय
ज्योतिष का संशोधन करने के लिए एक अच्छी वेधशाला हो जिसमें चन्द्रमा, ग्रहों
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