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सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

पृष्ठ 63, कुल 838 में से

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पृष्ठ 63

४० सूर्य सिद्धान्त
अब तक के सौर वर्षों की संख्या) अरबों में है। यदि त्रेता या कलियुग के आदि से
अहर्गण निकालना हो जिसके लिए आगे आदेश है, तो चान्द्रमास और सौर वर्ष के
सावन दिनों की संख्या सात दशमलव स्थानों तक लेना पर्याप्त होगा ।
अब यह परीक्षा करना रह गया कि यह संख्या शुद्ध है या नहीं । इसके लिए
केवल यह जाँचना पर्याप्त होगा कि सृष्टि से इतने दिनों के बाद कौन वार आरम्भ
होगा । यदि वार ठीक निकल आवे या १ दिन का अन्तर पड़े तो समझना चाहिए
कि अहर्गण ठीक है, नहीं तो अशुद्ध है । इसकी रीति आगे के श्लोक में दी हुई है !
सावनो द्युगणस्सूर्याद्दिनमासाब्दपास्ततः ।
सप्तभिः क्षयितश्शेषः सूर्याद्यो वास्रेश्वरः ॥५१॥
मासाब्ददिनसंख्याप्तौ द्वित्रिघ्नौ रूपसंयुतौ ।
सप्तोद्धृतावशेषौ तु विज्ञेयौ मासवर्षपौ ॥५२॥
अनुवाद-(५१) सावन दिनों की जो संख्या हो उससे दिनपति, मास-
पति और वर्षपति सूर्य से गिनकर जानना चाहिये । इस संख्या को ७ से भाग दे
दे जो शेष बचे वही सूर्य से वारों के क्रम से आरंभ होकर दिनपति है । (५२) यदि
इस (सावन दिनों की) संख्या को क्रम से मास और वर्ष के दिनों की संख्याओं से
भाग दे दें और भागफलों को क्रम से दो और तीन से गुणा करके, प्रत्येक गुणनफल
में एक जोड़ दे और योगफलों को ७ से भाग दे दें तो जो शेष बचे वही सूर्य से
वारों के क्रम से आरंभ हो कर क्रमानुसार मासपति और वर्षपति है ॥५१-५२॥
विज्ञान-भाष्य-वार ( दिन ) का नाम उस ग्रह के नाम पर रखा गया
है जो वार के आरंभ में पहले घंटे ( होरा ) का स्वामी समझा गया है। जो ग्रह
पहले घंटे का स्वामी होता है वही उस वार का भी स्वामी समझा जाता है। इसी
तरह सावन* मास के आरंभ में जो वार पड़ता है उसी का स्वामी उस सावन मास
का स्वामी समझा जाता है और सावन वर्ष के आरम्भ में जो वार पड़ता है उसी
का स्वामी उस सावन वर्ष का स्वामी समझा जाता है। जैसे रविवार के पहले घंटे
का स्वामी रवि, उस दिन का स्वामी रवि, जो सावन मास रविवार से आरंभ होता
है उस मास का स्वामी रवि और जो सावन वर्ष रविवार से आरंभ होता है उस
वर्ष का स्वामी भी रवि ही है ।
*सावन को श्रावण न समझना चाहिये । ३० सावन दिनों का जो मास होता
है वह सावन मास और १२ सावन महीनों का जो वर्ष होता है वह सावन वर्ष
कहलाता है ।