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सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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पृष्ठ 588

परिलेखाधिकार ५६३
∵ ख उ ग = ३२° ३१'
∴ मध्यकालिक चन्द्रमा के समप्रोतवृत्त का नतांश = ३२° ३१'
∴ ज्या (आक्षवलन) = ज्या ३२° ३१' × ज्या २५° २०' / कोज्या १४° १६'·५
= ·५३७५ × ·४२७६ / ·९६६१
= ·२३०० / ·९६६१
= ·२३७३
∴ आक्षवलन = १३° ४४' दक्षिण, क्योंकि चन्द्रमा पच्छिम कपाल में है।
मध्यग्रहणकालिक चन्द्रमा का सायन भोगांश = ३२१° १४'
इसमें ६०° जोड़ने पर चन्द्रमा का सायन भोगांश = ५१° १४' जिसकी
क्रान्ति उत्तर होगी इसलिए आयनवलन उत्तर होगा।
ज्या (आयनवलन) = ज्या २३° २७' × ज्या ५१° १४' / कोज्या १४° १६'·५
= ·३९७६ × ·७७६७ / ·९६६१
= ·३१०२ / ·९६६१
= ·३२०१
∴ आयनवलन = १८° ४०' उत्तर
इसलिए मध्यग्रहणकालिक स्फुटवलन = १३° ४४' दक्षिण + १८° ४०' उत्तर
= ४° ५६' उत्तर
इसलिए स्पर्श, मध्य और मोक्षकाल के परिलेख के आवश्यक अङ्क यह हुए :-
स्पर्शकाल सम्बन्धी—
स्फुटवलन = १६° १०' उत्तर (पृष्ठ ५०४)
∵ ज्या १६° १०' = ११२८'' = ११२८ / ७० = १६ अंगुल
चन्द्रशर = १४'·६ उत्तर (पृष्ठ ५००)
= १४·६ / ३ अंगुल = ४·८७ अंगुल