सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसूर्यग्रहणाधिकार ५४१
∴ लरि नतांश कोटिज्या = लरि कोज्या ४६°६' - लरि कोज्या ११°१७'
= ६.८४०६ - ६.६६१५ = ६.८४८१
∵ त्रिभोन लग्न का नतांश = ४५°३'
दृग्गति = त्रिभोन लग्न की नतांश कोटि ज्या = कोज्या ४५°३
∵ छेद = १ / (४ कोज्या ४५°३')
सूर्योदय से १४ घड़ी ४५.५ पल पर स्पष्ट सायन सूर्य = ६^रा २३°१४'
५५ पल की सूर्य की गति = १'
∴ १३ घड़ी ५० पल पर अथवा स्पर्शकालिक सूर्य = ६^रा २३°१३'
= २६३°१३'
त्रिभोन लग्न = ३०८°३'
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विश्लेषांश = १४°५०'
लंबन = ज्या विश्लेषांश / छेद
= ज्या १४°५०' × ४ × कोज्या ४५°३'
= ४ × .२५६० × .७०६५
= .७२३५ घड़ी
= ४३.४ पल = ४३ पल
मध्य ग्रहणकाल का लंबन = १ घड़ी ३५ पल
∴ दोनों का अन्तर = ५२ पल
इसलिए १६वें श्लोक के पूर्वार्ध के अनुसार
स्पष्ट स्पर्श स्थित्यर्थ = प्रथम स्थित्यर्थ + ५२ पल
= २ घड़ी ३० पल + ५२ पल
= ३ घड़ी २२ पल
इसलिए सूर्योदय से स्पर्शकाल तक का समय
= सूर्योदय से मध्यग्रहण का समय - ३ घड़ी २२ पल
= १६ घड़ी २० पल - ३ घड़ी २२ पल
= १२ घड़ी ५८ पल
∵ काशी में सूर्योदय से १२ घड़ी ५८ पल पर ग्रहण का स्पर्श होगा ।
इसी प्रकार स्पष्ट मोक्ष स्थित्यर्थ भी जान लेना चाहिये ।