सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसूर्यग्रहणाधिकार ५२१
ही कम होगी और दक्षिण होगी । काशी में इसका चरांश १०°४७' के लगभग होगा
और चरकाल १ घड़ी ४७.८ पल होगा । इसलिए काशी में स्पष्ट सूर्योदय ६ बजकर
१ घड़ी ४७.८ पल पर होगा ।
काल समीकरण— इस दिन का मध्यम सायन भोगांश जानने के लिए मध्य-
रात्रि के मध्यम सूर्य में १५' जोड़ देने से प्रातःकालिक मध्यम निरयन भोगांश होता
है ८^{रा}२६°४८' के लगभग । इसमें यदि अयनांश २२°४१' जोड़ा जाय तो मध्यम
सायन भोगांश होता है ८^{रा}२२°२६'=२६२°२६',
∴ काल-समीकरण = २३'.१७ ज्या २६२°२६'+११२'.८३ कोज्या २६२°२६'
—१४८' ज्या २ × २६२°२६'
= २३'.१७ (—ज्या ६७°३१')
+११२'.८३ कोज्या ६७°३१'
— १४८ ज्या ५८४°५८'१
= — २३'१.७ × .६२४० + ११२'.८३ × .३८२४
— १४८' (— .७०६७)
= २१.४ + ४३.२ + १०४.६
= १२६.४ असु
= + २१.१ पल
काशी में सूर्योदय का स्पष्ट काल = ६ बजकर १ घड़ी ४७.८ पल
काल समीकरण = + २१.१ पल
∴ काशी में सूर्योदय का मध्यकाल = ६ बजकर २ घड़ी ८.६ पल
परन्तु अमावस्यांत का मध्यकाल = ६ बजकर १६ घड़ी ५३.६ पल
∴ सूर्योदय से अमावस्यांत तक का समय = १४ घड़ी ४५ पल
अर्थात् सूर्योदय से १४ घड़ी ४५ पल पर काशी में अमावस्या का अन्त हुआ ।
अब यदि अमावस्यान्तकालिक सूर्य से १४ घड़ी ४५ पल की सूर्य की गति
घटा दी जाय तो सूर्योदय काल का स्पष्ट सूर्य ज्ञात हो जायगा जिससे सूर्य की उदय-
कालिक क्रान्ति , चर इत्यादि शुद्धतापूर्वक जाने जा सकते हैं ।
१. ५८४° ५८' = ३६०° + १८०° + ४४°५८'
∴ ज्या ५८४° ५८' = ज्या (१८०° + ४४°५८) = — ज्या ४४°५८' =
— .७०६७
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