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सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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पृष्ठ 513

४८८ सूर्य-सिद्धान्त
और पूर्णिमा की ,, ,, = ६ रा २७°४८′
दोनों का अन्तर = १३°४३′
इस प्रकार चन्द्रमा की स्पष्ट दैनिक गति १३°४३′ = ८२३′
सूर्य की ,, ,, ५७′·५
इसलिए १ सावन दिन में चन्द्रमा सूर्य की अपेक्षा ७६५′·५ अधिक
चलता है।
पूर्णिमा की मध्य रात्रि का चन्द्रमा ६ रा २७°४७′·६
,, ,, सूर्य ३ रा २८°३०′·७
दोनों का अन्तर = ५ रा २८°१६′·६
यह अन्तर ६ राशि से ४३′.१ कम है। इसलिए जब चन्द्रमा सूर्य से इतना
और आगे बढ़ेगा तब पूर्णिमान्त काल होगा। परन्तु ६० घड़ी में चन्द्रमा सूर्य से
७६५′·५ आगे बढ़ता है। इसलिए ४३′·१ वह ४३·१ × ६० / ७६५·५ घड़ी में पूरा करेगा जो
३ घड़ी २३ पल होता है। इसलिए गुरुवार की मध्य रात्रि से ३ घड़ी २३ पल
उपरान्त पूर्णिमान्त का अन्त हुआ।
अब पूर्णिमान्त काल के सूर्य और चन्द्रमा को स्पष्ट करना चाहिए।
सूर्य की स्पष्ट दैनिक गति = ५७′·५
∵ ३ घड़ी २३ पल की गति = ३′१४″·५ = ३′·२४
मध्य रात्रि कालिक सूर्य = ३ रा २८°३०′·७
∴ पूर्णिमान्तकालिक सूर्य = ३ रा २८°३३′·६ = ११८°३४′
चन्द्रमा की स्पष्ट दैनिक गति = ८२३′
∵ ३ घड़ी २३ पल की गति = ४६′२४″
= ४६′·४
मध्य रात्रिकालिक चन्द्रमा = ६ रा २७°४७′·६
∴ पूर्णिमान्तकालिक चन्द्रमा = ६ रा २८°३४′ = २८८°३४′
राहु की दैनिक गति = ३′११″
∵ ३ घड़ी ३ पल की गति = ११″ = ·२′
मध्य रात्रिकालिक राहु = ४ रा ३°५३′·२
राहु की गति उलटी होती है इसलिए इसमें से ३ घड़ी ३ पल की गति