सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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= ३ रा २८° ३०'·६५
= ११८° ३०'·६५
चन्द्रमा का मन्द केन्द्र = १ रा २८° ३४'·०२ - ६ रा २३° ३६'·२१
= ४ रा ४° ५४'·८१
= १ पाद + ३४° ५४'·८१
∵ दूसरे पाद का गम्य भाग = ५५° ५'·२
चन्द्रमा की स्फुट मन्द परिधि
= ३२° - २०' × भुजज्या ५५° ५'·२
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३४३८
= ३२° - २०' × २८१८
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३४३८
= ३२° - १६' = ३१° ४४' = १८०४'
∵ चन्द्रमा का भुजफल = १८०४ × २८१८
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२१६००
= २४८'·४ = ४° ८'·४
इसका धनु भी इतना ही होगा ।
इसलिए चन्द्रमा का मन्दफल = ४° ८'·४
यह धनात्मक है क्योंकि चन्द्रमा का मन्द केन्द्र अजादि ६ राशियों में है ।
इसलिए मध्यरात्रि का स्पष्ट चन्द्रमा
= ६ रा २३° ३६'·२ + ४° ८'·४
= ६ रा २७° ४४'·७ = ६ रा २७° ४८'
सूर्य और चन्द्रमा के स्पष्ट स्थानों से ज्ञात होता है कि चन्द्रमा सूर्य से १८०°
आगे नहीं है वरन् कुछ कम है इसलिए पूर्णिमान्त काल मध्यरात्रि से कुछ पीछे होगा
जब चन्द्रमा और सूर्य का अन्तर ठीक १८०° होता है । यह जानने के लिए कि
पूर्णिमान्त काल कब होगा हमें सूर्य और चन्द्रमा की स्पष्ट गतियां जाननी चाहिये ।
हमें यह मालूम है कि
सूर्य की मध्यम दैनिक गति ५६'·८'',
चन्द्रमा की ,, ७६०' ३५'',
चन्द्रोच्च की ,, ६' ४१'', = ६'·७,
और चन्द्रमा की दैनिक केन्द्र गति ७८३' ५४'' होती है ।