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सर्वकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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पृष्ठ 504

चन्द्रग्रहणाधिकार ४७६
समप्रोतवृत्त का नतांश ख गा अथवा कोण ख उ ग गोलीय त्रिकोणमिति के
आधार पर इस प्रकार शुद्धतापूर्वक जाना जा सकता है :-
पहले ग्रह के नतकाल से उसका नतांश ख ग पृष्ठ २६२ में सिद्ध किये गये
सूत्र (ख) से जान लेना चाहिए । फिर नतांश की सहायता से कोण ध ख ग पृष्ठ
२७६ में सिद्ध किये गये सूत्र से जानना चाहिए । जब नतांश ख ग और कोण ध ख
ग अथवा उ ख ग ज्ञात हो गये तब गोलीय त्रिभुज ख ख ग के तीन अङ्ग अर्थात् दो
भुज उ ख और ख ग तथा इनके बीच का कोण जानकर कोण ख उ ग सहज ही
जाना जा सकता है क्योंकि
कोस्परे (ख ग) x ज्या (ख उ)
= कोज्या (ख उ) कोज्या (उ ख ग) + कोस्परे (ख उ ग)¹ ज्या
(उ ख ग)
परन्तु यहाँ ख उ = ६०°, इसलिए ज्या (ख उ) = १ और कोज्या
(ख उ) = ०
∴ को स्परे (ख ग) = कोस्परे (ख उ ग) ज्या (उ ख ग)
कोस्परे ( ख उ ग ) = कोस्परे (ख ग) / ज्या (उ ख ग)
अथवा स्परे (ख उ ग) = ज्या (उ ख ग) / कोस्परे (ख ग)
= ज्या (उ ख ग) स्परे (ख ग)
परन्तु कोण उ ख ग = ६०° + ∠ पू ख ग
= ६०° + अ ग्रा²
∴ ज्या (उ ख ग) = ज्या (६०° + अग्रा) = कोज्या (अ ग्रा)
∴ स्परे (ख उ ग) = अग्रा कोटिज्या x नतांश स्पर्शरेखा
इसलिए सिद्ध हो गया है कि ग्रह के समप्रोतवृत्त की नतांश-ज्या को जानने
के लिए ग्रह की अग्रा की कोटिज्या को ग्रह के नतांश स्पर्शरेखा से गुणा कर देना
चाहिये ।
इस प्रकार ख उ ग कोण अथवा ख गा धनु का मान जान कर इसकी ज्या
को पृष्ठ ४७८ के सूत्र (१) में उत्थापित करने से आक्षवलन का मान ज्ञात होगा ।
१. देखो Todhunter and Leathem's Spherical Trigonometry,
PP. 26.
२. देखो पृष्ठ २७६'