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सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

पृष्ठ 421, कुल 838 में से

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पृष्ठ 421

३६८ सूर्य-सिद्धान्त
इसलिए सूत्र (३) के पहले पद का लघुरिक्थ = ३.४२१३६२
∵ पहला पद = २६३८''.५३
लरि प² = २ लरि प = ६.३२८७
ज्या २ ध = ज्या २ x ६१° १०' ४७''.४ = ६.६२६७
लरि कोछेर २'' = ५.०१३४
∴ दूसरे पद का लघुरिक्थ = १.२६८८
∵ दूसरा पद = + १८''.५७
लरि प³ = ३ लरि प = ४.४६३
लरि ज्या ३ घ = लरि ज्या ३ x ६१° १०' ४७''.४ = ८.७६१ ऋणात्मक
लरि कोछेर ३'' = ४.८३७
∴ तीसरे पद का लघुरिक्थ = ८.१२१ ऋणात्मक
∵ तीसरा पद = - ०''.०१
∴ ली = २६३८''.५३ + १८''.५७ - ०''.०१
= २६५०''.०६
= ४४' १७''.०६ = ४४' १७''.१
∵ चंद्रमा का स्पष्ट नतकाल
= ६१° १०' ४७''.४ + ४४' १७''.१
= ६१° ५५' ४''.५
यदि वही स्पष्ट नतकाल दिया होता तो सूत्र (१) से विषुवांश लंबन इस
प्रकार जाना जाता :-
लरि ज्या ली = लरि प + लरि ज्या ६१° ५५' ४''.५
= ८.१६४३६५ x ६.६४५६०४
= ८.१०६६६६
∴ ली = ४४' १७''.०६
इस प्रकार किसी स्थान के विषुवांश लंबन की सारिणी तैयार की जा
सकती है ।
चन्द्रमा का क्रान्ति लम्बन (Parallax in declination) जानना
इस काम के लिए भी चित्र ७७ काम देगा । मान लो कि चंद्रमा की यथार्थ
क्रान्ति क, यथार्थ नतांश न और यथार्थ नतकाल घ है और लंबन के कारण चंद्रमा
की स्पष्ट क्रान्ति, स्पष्ट नतांश और स्पष्ट नतकाल क्रमानुसार का, ना, और
घा हैं।