सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

पृष्ठ 398, कुल 838 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 398

त्रिप्रश्नाधिकार ३७५
यदि इस समीकरण में न और ना के मान जो वेध से जाने जाते हैं उत्थापित
किये जायें तो तीन अज्ञात अंकों प, फ और अ का एकघात (linear) समीकरण आ
जाता है । इसी प्रकार यदि तीन तारों के स्पष्ट नतांश वेध से जान लिये जायें तो तीन
समीकरण मिल जायेंगे जिनसे प, फ और अ के मान सहज ही जाने जा सकते हैं ।
चित्र ७२
उ स द = स स्थान की उत्तर दक्खिन रेखा
उ, द = क्षितिज के क्रमशः उत्तर दक्षिण विन्दु
उ ध ख व द = यामोत्तर वृत्त
ध = उत्तरी आकाशीय ध्रुव
ख = स स्थान का खस्वस्तिक
व = विषुवद्वृत्त और यामोत्तर वृत्त का सामान्य विन्दु
त = यामोत्तरोल्लंघन के समय तारे का उच्चतम स्थान
ता = यामोत्तरोल्लंघन के समय उसी तारे का नीचतम स्थान
ग = सूर्य का ग्रीष्मायन विन्दु
श = सूर्य का शीतायन विन्दु