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सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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३६२ सूर्य-सिद्धान्त
अनुसार बदलता है । इसको पहले पारदर्शक पदार्थ से दूसरे पारदर्शक पदार्थ का
वर्तनाङ्क (index of refraction) कहते हैं । जब प्रकाश पतले पारदर्शक पदार्थ से
घन पारदर्शक पदार्थ में जाता है तब वर्तित किरण लम्ब की ओर झुक जाती है अर्थात्
वर्तित कोण आपात कोण से छोटा होता है । परन्तु जब प्रकाश घने पदार्थ से पतले
पदार्थ में जाता है तब वह लम्ब से दूर हो जाता है । चित्र ६६ में ज ज पदार्थ ह ह
पदार्थ से घना है इसलिए ज ज में वर्तित किरण लम्ब की ओर हो गई है और ज ज
से निकल कर ह ह में आते समय वह लम्ब से दूर हो गयी है । यदि प्रकाश की दिशा
उलट जाय अर्थात् ज ज में इसकी दिशा न प हो तो ह ह में इसकी दिशा प स हो
जायगी । कई पारदर्शक पदार्थों में होता हुआ प्रकाश जिस जिस वक्र या टूटी हुई
रेखा से जाता है यदि दिशा उलट जाय तो उसी उसी रेखा से वह लौट भी आता है ।
मान लो ह ह, हि हि तीन पारदर्शक पदार्थों के स्तर हैं जो परस्पर
समानान्तर हैं ।
चित्र ६७
यदि ह ह से हा हा का वर्तनाङ्क धा हो और ह ह से हि हि का वर्तनांक धि है
तो हा हा से हि हि के वर्तनाङ्क का ज्ञान सहज ही हो सकता है । यह परीक्षा से
अनुभव किया जा सकता है कि यदि प्रकाश ह ह से हा हा और हि हि होता हुआ
फिर ह ह में प्रवेश करे तो इसकी जो दिशा पहले ह ह में होती है वही अन्त में भी
होती है अर्थात् ह ह और हा हा के प्रवेश बिंदु पर जो अ पात कोण बनता है वही
हि हि से ह ह में निकलते समय निर्गत बिंदु पर भी बनता है । वर्तन के नियम के
अनुसार