सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंविप्रश्नाधिकार ३६१
यदि प्रकाश की कोई किरण स प एक सजातीय पारदर्शक पदार्थ ह ह से
दूसरे सजातीय पारदर्शक पदार्थ ज ज में प विन्दु से प्रवेश करके प न दिशा में
चलती हुई न विन्दु से वह फिर ह ह पदार्थ में निकल आती है तो न सा और स प
किरणें समानान्तर होती हैं । स प को आपात किरण (incident ray) प न को वर्तित
किरण (refracted ray) और न सा को निर्गत किरण (emergent ray) कहते हैं ।
यदि प विन्दु पर ल प ला लम्ब (Normal) हो तो स प ल कोण को आपात कोण
(angle of incidence) और न प ला कोण को वर्तित कोण (angle of refrac-
tion) कहते हैं । आपात और वर्तित किरणों तथा प्रवेश विन्दु का लम्ब एक ही तल
में रहते हैं ।
आपात और वर्तित कोणों में जो परस्पर सम्बन्ध होता है वह नीचे के सूत्र
से प्रकट किया जाता है—
आपात कोण की ज्या / वर्तित कोण की ज्या = स्थिर संख्या
यदि आपात कोण को अ, वर्तित कोण को व और स्थिर संख्या को ध से
सूचित किया जाय तो उपर्युक्त सूत्र का सरल रूप यह होगा
ज्या अ / ज्या व = ध; अथवा ज्या अ = ध × ज्या व
चित्र ६६
अ के बदलने से व भी इस तरह बदलेगा कि इन दोनों की ज्याओं का
सम्बन्ध सदैव ध के समान होगा । ध का परिणाम दो पारदर्शक पदार्थों के गुण के